नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) ने इंदौर के पांडे दंपति के खिलाफ दर्ज प्रकरण में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने इंदौर पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि, “यदि कानून और नियमों के तहत संभव हो, तो दंपति के मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाए और उन्हें राहत देने पर विचार किया जाए।”
मंत्री विजयवर्गीय ने पत्र में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा लगाए गए आरोपों की चर्चा भी की। उन्होंने बताया कि सिंघार ने उन पर दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों को लेकर अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेताओं की ओर से इन आरोपों को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया।
विधानसभा की रिकॉर्डिंग में आरोप साबित नहीं हुए- विजयवर्गीय बोले
विजयवर्गीय ने पत्र में बताया कि इस मामले की जांच के लिए विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया था। विधानसभा की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के बाद अध्यक्ष ने सदन में स्पष्ट किया कि विजयवर्गीय द्वारा ऐसा कोई अपमानजनक या आपत्तिजनक शब्द नहीं कहा गया था। उन्होंने पत्र में इन आरोपों को असत्य और निराधार बताया है।
मैंने पुलिस में कोई शिकायत नहीं की- विजयवर्गीय बोले
पत्र में विजयवर्गीय ने लिखा कि सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर भ्रम की स्थिति बनी। इसी विवाद के बीच इंदौर निवासी पांडे दंपति उनकी कॉलोनी में प्रदर्शन करने पहुंचे थे। प्रदर्शन की घोषणा पहले ही सोशल मीडिया पुलिस को मिल चुकी थी। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था की गई। पुलिस बल तैनात किए गए। पत्र में उन्होंने कहा कि, “प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए दंपति के खिलाफ कार्रवाई की। मामला दर्ज करने के बाद उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया गया।”
बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए माता-पिता की गलती का असर
विजयवर्गीय ने पत्र में बताया कि इस घटना के समय वे विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त थे और सत्र खत्म होने के बाद उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली। बाद में उन्हें पता चला कि संबंधित दंपति के दो छोटे बच्चे हैं। उन्होंने लिखा, “मेरा मानना है कि माता-पिता से हुई भूल का असर उनके मासूम बच्चों पर नहीं पड़ना चाहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन या संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उन्होंने पुलिस प्रशासन को कोई शिकायत नहीं दी थी। इस मामले में उनकी कोई व्यक्तिगत शिकायत या आपत्ति भी नहीं है।
पुलिस आयुक्त से राहत पर विचार करने का अनुरोध
पत्र के आखिर में विजयवर्गीय ने इंदौर पुलिस आयुक्त से कहा कि, “यदि विधि और नियमों के तहत संभव हो तो पांडे दंपति के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई कर उन्हें राहत देने का प्रयास किया जाए।” उन्होंने यह उम्मीद जताई कि सोशल मीडिया पर हुए दुष्प्रचार का शिकार रहे दंपति अब असलियत समझ चुके होंगे और भविष्य में किसी भ्रामक जानकारी के आधार पर ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।







