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एमपी पुलिस के पहले ‘डिजिटल मालखाना’ की शुरुआत, अब QR कोड स्कैन कर, जब्त माल की हो सकेगी स्मार्ट ट्रैकिंग व सुरक्षा

Reported by:Shakil Ansari|Edited by:Atul Saxena
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वरिष्ठ अधिकारी वेब और मोबाइल डैशबोर्ड के जरिए कहीं से भी मालखाने की निगरानी कर सकेंगे। डिजिटल ट्रैकिंग के कारण प्रॉपर्टी के गुम होने या चोरी होने का भय नहीं रहेगा। भविष्य में इसे बायोमेट्रिक्स और सीसीटीवी से भी जोड़ा जाएगा।
एमपी पुलिस के पहले ‘डिजिटल मालखाना’ की शुरुआत, अब QR कोड स्कैन कर, जब्त माल की हो सकेगी स्मार्ट ट्रैकिंग व सुरक्षा

मध्य प्रदेश पुलिस अब हाईटेक होती जा रही है, अपराधों पर नियंत्रण और खुलासों में आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग कर अपराधियों की नकेल कसने वाली पुलिस अब मालखानों में रखे गए जब्त सामान और साक्ष्यों की भी आधुनिक तरीके से सुरक्षा करेगी इस क्रम में आज इंदौर पुलिस कमिश्नरेट ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने आज थाना गांधी नगर नगरीय इंदौर में प्रथम डिजिटल मालखाना का विधिवत शुभारंभ किया जो मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में भी प्रथम है, बता दें QR-कोड आधारित स्मार्ट ट्रैकिंग के माध्यम से अब केस प्रॉपर्टी (जब्त माल) का संग्रह, सुरक्षा और निगरानी पूरी तरह पारदर्शी और रियल-टाइम होगी।

डिजिटली होगी निगरानी 

डिजिटलाइजेशन की मुख्य प्रक्रिया मध्यप्रदेश पुलिस की एससीआरबी शाखा के सहयोग से संचालित की गई है, इसकी मदद से संचालित इस प्रोजेक्ट के तहत पारंपरिक मालखाना प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया गया है, अब इसकी निगरानी आधुनिक तकनीक के माध्यम से की जाएगी

  • डेटा एंट्रीः- जब्त माल का विश्लेषण कर उसके फोटो, दस्तावेज और संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर डिजिटल मालखाना सॉफ्टवेयर पर अपलोड किए जाते हैं।
  • यूनिक कोडिंगः- प्रत्येक वस्तु के लिए एक यूनिक बार-कोड जनरेट होता है, जिसे संबंधित माल पर चस्पा किया जाता है।
  • स्मार्ट स्टोरेजः- जिस बॉक्स में माल रखा जाता है, उस पर QR-कोड लगाया जाता है, जिससे उसकी लोकेशन तुरंत ट्रेस की जा सके। यही प्रक्रिया वाहनों और अन्य बड़ी संपत्तियों के लिए भी लागू की गई है।

डिजिटल मालखाना की विशेषताएं

  • रियल-टाइम एक्सेसः प्रॉपर्टी के प्रकार, मात्रा और स्थिति की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी।
  • सुरक्षित प्रबंधनः डिजिटल ट्रैकिंग के कारण प्रॉपर्टी के गुम होने या चोरी होने का भय नहीं रहेगा। भविष्य में इसे बायोमेट्रिक्स और सीसीटीवी से भी जोड़ा जाएगा।
  • त्वरित ऑडिटः निरीक्षण के दौरान अब मैनुअल रजिस्टर खोजने की जरूरत नहीं होगी; सॉफ्टवेयर स्वतः स्टॉक रिपोर्ट और लॉग हिस्ट्री जनरेट करेगा।
  • स्मार्ट डैशबोर्डः वरिष्ठ अधिकारी वेब और मोबाइल डैशबोर्ड के जरिए कहीं से भी मालखाने की निगरानी कर सकेंगे।

इंदौर पुलिस कमिश्नरेट की इस अभिनव पहल के शुभारंभ के अवसर पर पुलिस कमिश्नर इंदौर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि, तकनीक का यह प्रयोग न केवल साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में भी तेजी लाएगा और आमजन की सुरक्षा व उनके हितों को ध्यान में रखते हुए इंदौर पुलिस आधुनिक तकनीकी का सहारा लेकर नित नए प्रयासों से पुलिसिंग को और उन्नत करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगा।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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