पुलिस के बार समझाने और चेतावनी देने के बावजूद लोग साइबर ठगों के चंगुल में फंस जाते हैं, ताजा मामला इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र का है जहाँ एक आशा कार्यकर्ता से साइबर ठगी का मामला सामने आया है। फोन करने वाले ने खुद को नायब तहसीलदार बताया और सरकारी योजना के तहत पैसा भेजने के नाम पर ठगी कर ली।
एसीपी रुबीना मिजवानी ने बताया कि फोन करने वाले ने आशा कार्यकर्ता को शौचालय की मरम्मत के नाम पर रुपए भेजने का झांसा दिया और महिला के खाते से 50 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए। शिकायत के बाद बाणगंगा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
फ्रॉड की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि बाणगंगा थाना क्षेत्र में रहने वाली आशा कार्यकर्ता वेक्सिनेशन का काम करती है दोपहर वह अपनी साथी कांता के साथ थी। इसी दौरान उनके मोबाइल पर कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को नायब तहसीलदार अधिकारी बताते हुए कहा कि आपकी आंगनबाड़ी के शौचालय की स्थिति खराब है और उसकी मरम्मत करवानी है।
शौचालय की मरम्मत के नाम पर साइबर ठगी
फोन करने वाले ने शौचालय की मरम्मत के लिए रुपए उनके खाते में भेजने की बात कही और कहा कि उनकी आशा “सर” से इस विषय में बात हो चुकी है। फरियादिया ने पहले अपने अधिकारी के खाते में भुगतान करने की बात कही, लेकिन उसने कहा कि अधिकारी ने उन्हीं के खाते में रुपए डालने को कहा है। आरोपी ने पहले 10 रुपए भेजे और मोबाइल पर मैसेज आने की पुष्टि करने को कहा।
15 हजार और 35 हजार रुपए के दो ट्रांजैक्शन दिखाए
मैसेज की पुष्टि हो जाने के बाद अलग अलग दो ट्रांजेक्शन का ट्रांजैक्शन मैसेज भेजा गया, जिसे आरोपी ने तकनीकी कारणों से फेल होना बताया। उसने कहा कि भुगतान खाते में नहीं पहुंच रहा है और अब खाते में ही रुपए भेजे जाएंगे। इसके बाद उनके खाते में 15 हजार और 35 हजार रुपए के दो ट्रांजैक्शन दिखाए गए।
खाते में जमा नहीं हुई राशि बल्कि कट गई
हालांकि वास्तव में कोई रकम खाते में जमा नहीं हुई, बल्कि इतनी ही राशि उनके खाते से कट गई। दोनों ट्रांजैक्शन पंजाब नेशनल बैंक के एक खाते में पहुंचे। ठगी का पता चलने के बाद फरियादिया ने परिजन को जानकारी दी। इसके बाद साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की गई। पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।






