नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के संकेतों के बीच, भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने जयपुर शहर का दौरा किया। उन्होंने ‘गुलाबी शहर’ की खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत की जमकर तारीफ की और कहा कि वह इसकी भव्यता से पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गए हैं।
राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा, ‘भारत की चमकदार संस्कृति और खूबसूरत वास्तुकला से ऐसे कई पल आते हैं जब मैं मंत्रमुग्ध हो जाता हूं, और जयपुर निश्चित रूप से उनमें से एक है।’ उनके इस दौरे को दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
There are always moments when I am captivated by India’s radiant culture and beautiful architecture, and #Jaipur is undoubtedly one of them. pic.twitter.com/CAL1ldU6Yi
— Xu Feihong (@China_Amb_India) February 21, 2026
6 साल के लंबे अंतराल के बाद उड़ान सेवा बहाल
यह सकारात्मक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों ने व्यापार और यात्रा को सुगम बनाने के लिए एक बड़ी पहल की है। लगभग 6 साल के लंबे इंतजार के बाद, 1 फरवरी को एयर इंडिया ने शंघाई और नई दिल्ली के बीच अपनी सीधी उड़ान सेवा फिर से शुरू कर दी। यह सेवा 2020 की शुरुआत में निलंबित कर दी गई थी।
शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे संबंधों में एक नई गति का प्रमाण बताया।
“शंघाई और नई दिल्ली के बीच सीधी उड़ानों की बहाली भारत-चीन संबंधों में नई गति का एक ठोस प्रमाण है। बेहतर एयर कनेक्टिविटी व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है, खासकर भारत और पूर्वी चीन के बीच।”- प्रतीक माथुर, महावाणिज्य दूत
साप्ताहिक 4 उड़ानों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
जानकारी के अनुसार, शंघाई के पुडोंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पहली उड़ान बोइंग 787 विमान में 230 से अधिक यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी। एयर इंडिया अब इस महत्वपूर्ण मार्ग पर सप्ताह में चार उड़ानें संचालित करेगी, जिसमें आधुनिक केबिन सुविधाओं वाले बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमानों का उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सीधी उड़ानों की बहाली से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि व्यापारिक संबंधों को भी मजबूती मिलेगी, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान का एक नया दौर शुरू हो सकता है।





