लीबिया के पूर्व तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की मंगलवार (3 फरवरी 2026) को गोली मारकर हत्या कर दी गई। लीबियाई मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की है। 53 वर्षीय सैफ की हत्या जिंटान शहर में उनके घर पर हुई, जहां चार हथियारबंद लोगों ने हमला किया।
उनके वकील के अनुसार हमलावरों को एक कमांडो यूनिट बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह हमला किसने और किस उद्देश्य से किया। AFP की रिपोर्ट में बताया गया कि सैफ अल-इस्लाम को एक समय अपने पिता का उत्तराधिकारी माना जाता था और वे लीबिया की राजनीति में प्रमुख चेहरा थे।
42 साल तक चला गद्दाफी का शासन
सैफ के पिता मुअम्मर गद्दाफी ने 1969 से 2011 तक लीबिया पर शासन किया। साल 2011 में देश में हुए विद्रोह के बाद गद्दाफी सरकार का अंत हो गया था। 1972 में जन्मे सैफ अल-इस्लाम ने 2000 के दशक में लीबिया और पश्चिमी देशों के बीच संबंध सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप लीबिया ने अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ दिया। इसके बाद देश पर लगे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए गए। इन कोशिशों से सैफ की राजनीतिक पहचान मजबूत हुई, हालांकि वे कभी किसी सरकारी पद पर नहीं रहे।
मौत की सजा और छह साल जेल में
2011 में गद्दाफी सरकार के पतन के बाद सैफ अल-इस्लाम पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने का आरोप लगाया गया था। जिंटान की एक मिलिशिया ने उन्हें करीब छह साल तक जेल में रखा। साल 2015 में लीबिया की एक अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी।
राष्ट्रपति पद के लिए ठाना था इरादा
सैफ अल-इस्लाम ने 2021 में लीबिया के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने की घोषणा की थी, लेकिन देश की राजनीतिक अस्थिरता के कारण चुनाव टाल दिए गए। उन्होंने हमेशा कहा था कि वे सत्ता को विरासत में लेने के पक्षधर नहीं हैं। उनका मानना था कि सत्ता कोई जमीन-जायदाद नहीं है जिसे विरासत में लिया जाए।
सैफ अल-इस्लाम की हत्या के बाद लीबिया की राजनीति में एक बार फिर अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। देश पहले से ही विभिन्न गुटों और मिलिशियाओं के बीच सत्ता संघर्ष का सामना कर रहा है।





