आज दुनियाभर में विश्व कैंसर दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन कैंसर के खिलाफ जागरूकता फैलाने, रोकथाम, शीघ्र निदान और प्रभावी उपचार को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज भी बड़ी संख्या में लोग जानकारी की कमी, देर से जांच और इलाज तक सीमित पहुंच के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कैंसर से होने वाली लगभग 30–50 प्रतिशत मौत जीवनशैली में सुधार और समय पर जांच से रोकी जा सकती हैं।
आज के दिन सीएम मोहन यादव ने लोगों से जागरूक रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ‘कैंसर से सुरक्षा का सबसे प्रभावी कवच जागरूकता, समय पर जांच और उपचार है। आइए, विश्व कैंसर दिवस पर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और समाज को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करने का संकल्प लें। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम स्वस्थ जीवन का आधार है।’
विश्व कैंसर दिवस मनाने का उद्देश्य
विश्व कैंसर दिवस का मुख्य उद्देश्य है लोगों में कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाना, गलत धारणाओं को हटाना, रोकथाम के उपायों को प्रोत्साहन देना और कैंसर से जुड़ी जानकारियों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना। इस दिन कैंसर के नियंत्रण, पहचान, उपचार और रोगियों के प्रति अनुकूल वातावरण बनाने पर जोर दिया जाता है। विश्व कैंसर दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 में पेरिस में आयोजित विश्व कैंसर समिट के दौरान हुई थी जब UICC ने इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता दी थी। इसके बाद से यह दिन वैश्विक स्तर पर कैंसर के खिलाफ एकजुट प्रयासों का प्रतीक बन गया है।
कारण और निवारण
कैंसर तब होता है जब शरीर की कोशिकाओं में डीएनए म्यूटेशन के कारण उनका नियंत्रण खत्म हो जाता है और वे अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर के प्रमुख कारणों में तंबाकू और धूम्रपान, अत्यधिक शराब सेवन, अस्वास्थ्यकर आहार, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, यूवी किरणें, वायु प्रदूषण, कुछ संक्रामक वायरस जैसे HPV और हेपेटाइटिस बी-सी, तथा आनुवंशिक कारक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर निदान से कैंसर के उपचार की सफलता दर कई गुना बढ़ जाती है। इसके लिए नियमित स्क्रीनिंग जैसे मैमोग्राफी, पैप स्मियर, कोलोनोस्कोपी, साथ ही ब्लड जांच, सीटी स्कैन, एमआरआई और बायोप्सी जैसी जांच विधियां बेहद महत्वपूर्ण हैं। विश्व कैंसर दिवस यह याद दिलाता है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई सिर्फ चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जागरूकता, संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयासों की मांग करती है। यदि सही जानकारी और उचित देखभाल और समय पर इलाज मिले तो इस बीमारी पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।





