ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ओमान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक अहम बैठक के खत्म होते ही, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए और सख्त प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। इन प्रतिबंधों का सीधा निशाना ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़े नेटवर्क पर है।
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी गई। इस नई सूची में 15 संस्थानों, दो व्यक्तियों और 14 तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ जहाजों को शामिल किया गया है, जो कथित तौर पर ईरान के अवैध तेल व्यापार में शामिल थे।
पेट्रोलियम राजस्व पर लगाम कसने की कोशिश
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईरान इन उत्पादों के अवैध व्यापार से मिले राजस्व का इस्तेमाल अपनी ‘दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों’ को अंजाम देने के लिए करता है। विदेश विभाग ने स्पष्ट किया कि ईरानी शासन अपने लोगों के कल्याण और देश के जर्जर बुनियादी ढांचे में निवेश करने के बजाय, इस पैसे का उपयोग दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को वित्तपोषित करने में कर रहा है।
बयान में यह भी कहा गया कि देश के भीतर भी दमन को और तेज करने के लिए इसी राजस्व का इस्तेमाल हो रहा है। यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान के अवैध तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को न्यूनतम स्तर पर लाना है।
अमेरिका ने दी भविष्य में भी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिका ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरानी शासन प्रतिबंधों से बचने के रास्ते खोजता रहेगा और तेल राजस्व का इस्तेमाल दमनकारी व्यवहार, आतंकवादी गतिविधियों और अपने प्रॉक्सी संगठनों के समर्थन में करता रहेगा, तब तक अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।
विदेश विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा, “हम ईरानी शासन और उसके साझेदारों, दोनों को जवाबदेह ठहराने के लिए लगातार कार्रवाई करते रहेंगे।” गौरतलब है कि ईरान में हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और लगातार धमकियों का दौर जारी था, जिसके बाद ओमान में यह बैठक हुई थी।





