दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में साल 2026 की शुरुआत एक बड़े सियासी भूचाल के साथ हुई है। अमेरिकी सेना ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए ‘लिमिटेड मिलिट्री ऑपरेशन’ (सीमित सैन्य अभियान) के तहत वेनेजुएला में कार्रवाई की है। इस ऑपरेशन के दौरान देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया गया है। इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है और वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजधानी कराकास में तड़के अचानक धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके तुरंत बाद कई इलाकों में बिजली गुल हो गई और शहर में असामान्य सैन्य गतिविधियां देखी गईं। कुछ ही घंटों के भीतर वाशिंगटन से पुष्टि हुई कि अमेरिकी बलों ने मादुरो को हिरासत में ले लिया है और उन्हें अमेरिकी सैन्य निगरानी में देश से बाहर ले जाया गया है।
युद्ध नहीं, कानूनी कार्रवाई: अमेरिका
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी युद्ध की घोषणा नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी अदालतों में मादुरो के खिलाफ पहले से दर्ज आपराधिक मामलों के तहत उठाया गया है। अमेरिका लंबे समय से मादुरो प्रशासन पर ड्रग तस्करी, भ्रष्टाचार और चुनाव में धांधली जैसे गंभीर आरोप लगाता रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कूटनीतिक दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद कोई हल न निकलने पर यह कदम उठाना पड़ा।
संप्रभुता पर हमला: वेनेजुएला
दूसरी तरफ, वेनेजुएला सरकार ने इस कार्रवाई को देश की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। कराकास में अधिकारियों ने अमेरिकी कदम की कड़ी निंदा की है। मादुरो सरकार का कहना है कि अमेरिका केवल राजनीतिक दबाव बनाने और वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों पर नियंत्रण करने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहा है। राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद से देश में माहौल बेहद तनावपूर्ण है और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
रूस-चीन समेत कई देशों ने की निंदा
इस घटना पर वैश्विक प्रतिक्रिया काफी तीखी रही है। रूस, चीन, ईरान और क्यूबा ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। कई लैटिन अमेरिकी देशों ने भी इस तरह के सैन्य हस्तक्षेप से क्षेत्रीय स्थिरता बिगड़ने की चिंता जताई है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
इतिहास में पहले भी हुए ऐसे एक्शन
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने किसी विदेशी शासक के खिलाफ सीधे सैन्य कार्रवाई की हो। इससे पहले भी ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं:
- 1989 (पनामा): अमेरिकी सेना ने पनामा के राष्ट्रपति मैनुएल नोरिएगा को गिरफ्तार किया था और उन पर अमेरिका में मुकदमा चलाया गया।
- 1983 (ग्रेनेडा): अमेरिकी नेतृत्व वाली कार्रवाई के बाद वहां की सरकार बदली गई थी।
- 2003 (इराक): सद्दाम हुसैन की सत्ता को अमेरिकी सैन्य अभियान के जरिए खत्म किया गया था।
इन सभी मामलों में अमेरिका ने सुरक्षा और कानून का हवाला दिया था, जबकि आलोचकों ने इसे हमेशा दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल और संप्रभुता का उल्लंघन माना है।
अनिश्चितता के बादल
निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला का भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है। हालांकि, अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह वेनेजुएला पर स्थायी शासन नहीं करना चाहता, लेकिन संक्रमणकालीन व्यवस्था में उसकी भूमिका हो सकती है। फिलहाल, देश में राजनीतिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शन बढ़ने की आशंका है, जिससे आर्थिक संकट और गहरा सकता है।





