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अमेरिका में 6 साल बाद शटडाउन, लाखों सरकारी कर्मचारी बिना सैलरी काम करने को होंगे मजबूर

Written by:Bhawna Choubey
Last Updated:
अमेरिका में 6 साल बाद सरकारी शटडाउन लागू हुआ है। लाखों सरकारी कर्मचारी बिना वेतन के काम करने को मजबूर होंगे, जबकि गैर-जरूरी सेवाएं बंद कर दी गई हैं। यह संकट न सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था बल्कि आम नागरिकों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर भी गहरा असर डाल सकता है।
अमेरिका में 6 साल बाद शटडाउन, लाखों सरकारी कर्मचारी बिना सैलरी काम करने को होंगे मजबूर

अमेरिका में 1 अक्तूबर को नया वित्त वर्ष शुरू होते ही एक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने लाखों लोगों की नींद छीन ली। संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) सरकार का फंडिंग बिल पास नहीं हो सका और ठीक रात 12:01 बजे से सरकारी फंडिंग रुक गई। इसका सीधा मतलब है, सरकारी शटडाउन।

छह साल बाद अमेरिका (US) को फिर इस हालात का सामना करना पड़ा है। सरकारी दफ्तरों से लेकर विभिन्न एजेंसियों तक, सब जगह अब ‘अस्थायी ताले’ की स्थिति है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी तो काम करेंगे लेकिन उन्हें वेतन नहीं मिलेगा। वहीं, गैर-जरूरी सेवाओं में कार्यरत लाखों फेडरल कर्मचारी मजबूरन बिना वेतन की छुट्टी पर भेज दिए जाएंगे।

शटडाउन का मतलब और असर

शटडाउन क्यों होता है?

अमेरिकी संविधान के तहत सरकार हर साल के बजट और खर्चों को मंजूरी देने के लिए संसद में स्पेंडिंग बिल पास कराती है। अगर यह बिल पास नहीं होता तो सरकार के पास वेतन और सेवाओं के लिए पैसा जारी करने का अधिकार खत्म हो जाता है। यही स्थिति अभी बनी है।

कितने कर्मचारी प्रभावित होंगे?

इस बार अनुमान है कि करीब 8 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। इनमें से लगभग 40 प्रतिशत को वेतन के बिना अस्थायी छुट्टी पर भेजा जाएगा, जबकि सैन्यकर्मी और आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारी काम करते रहेंगे लेकिन बिना वेतन के।

कौन-कौन सी सेवाएं रुकेंगी?

  • फूड एंड ड्रग इंस्पेक्शन
  • फूड असिस्टेंस प्रोग्राम
  • फेडरल स्कूल और स्टूडेंट लोन प्रोसेसिंग
  • कई रिसर्च प्रोग्राम और प्रशासनिक सेवाएं

अमेरिकी नागरिकों पर सीधा असर

दैनिक जीवन में कठिनाइयां
सरकारी कर्मचारियों के वेतन रुकने का असर उनके परिवारों पर तुरंत दिखेगा। लाखों लोग अपने EMI, मेडिकल बिल और बच्चों की शिक्षा फीस चुकाने में दिक्कत का सामना करेंगे।

हवाई यात्राओं पर संकट
हवाई सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन एयरलाइंस ने चेतावनी दी है कि फ्लाइट में देरी और रद्दीकरण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यात्रियों को लंबी लाइनों और सुरक्षा जांच में ज्यादा समय लग सकता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं
केंद्र संचालित स्कूलों और स्टूडेंट लोन की प्रोसेसिंग पर असर पड़ेगा। वहीं, कई स्वास्थ्य कार्यक्रमों की फंडिंग में कमी आएगी जिससे आम नागरिक प्रभावित होंगे।

अर्थव्यवस्था पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह शटडाउन लंबे समय तक चलता है तो इसका असर अमेरिकी शेयर बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। स्टॉक मार्केट में गिरावट आ सकती है। उद्योग और कंपनियों में अस्थिरता बढ़ेगी। उपभोक्ता खर्च घटेगा जिससे मंदी का खतरा गहरा सकता है।

राजनीतिक पेंच और विवाद

शटडाउन का बड़ा कारण राजनीति है। विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी का आरोप है कि राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है।

ट्रंप प्रशासन ने सीनेट में आखिरी समय पर सात सप्ताह की फंडिंग एक्सटेंशन का प्रस्ताव रखा था। इस पर 55 वोट पक्ष में और 45 विपक्ष में पड़े, लेकिन इसे पास होने के लिए 60 वोट चाहिए थे। नतीजा शटडाउन टल नहीं पाया।

भारत और बाकी दुनिया के लिए क्या मायने?

अमेरिकी शटडाउन का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। भारत जैसे देशों पर सीधा असर निवेश और बाजार की अस्थिरता के रूप में पड़ेगा। आईटी सेक्टर को अमेरिकी प्रोजेक्ट्स में देरी का सामना करना पड़ सकता है। विद्यार्थियों और स्कॉलर्स के लिए वीज़ा प्रोसेसिंग और शैक्षणिक कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।

अब आगे क्या होगा ?

अमेरिका की राजनीति अब एक ‘अनिश्चित भविष्य’ के मोड़ पर खड़ी है। अगर संसद जल्द कोई रास्ता नहीं निकालती, तो लाखों परिवारों के सामने रोज़मर्रा का संघर्ष और कठिन होगा। वहीं, वैश्विक निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिरता को लेकर चिंतित हैं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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