जबलपुर, संदीप कुमार। कोरोना वायरस के बाद अब मध्यप्रदेश में धीरे धीरे फंगस ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। ब्लैक फंगस से शुरू हुई बीमारी में कई रंग के फंगस आ गए है। जबलपुर जिले में ब्लैक, व्हाइट फंगस के बाद अब क्रीम फंगस ने दस्तक दे दी है जिससे मरीज भी प्रभावित होने लगे हैं। हालांकि अभी तक ब्लैक फंगस ही सबसे ज्यादा खतरनाक रूप में सामने आया है। मेडिकल कॉलेज में पदस्थ डॉक्टरों की मानें तो क्रीम फंगस सामान्य तौर से शरीर में पाया जाता है, लेकिन यह खतरनाक नहीं है।
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डॉक्टरों के मुताबिक अगर कोरोना वायरस के इलाज के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और फंगस को खत्म करने वाली कोशिकाएं काम नहीं कर पा रही हैं, तो फंगस उनके शरीर में फंगस जगह बना लेता है। सामान्य तौर पर शरीर में फंगस आते हैं और चले जाते हैं। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में फंगल इंफेक्शन से प्रभावित अभी 100 मरीजों का इलाज चल रहा है, इसके अलावा जबलपुर के दूसरे निजी अस्पतालों में भी 50 मरीज फंगल इन्फेक्शन का इलाज करवा रहे हैं।
ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल हो रहे इंजेक्शन एंफोटरइसिन-बी की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने के लिए भी सरकार को हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। गुरूवार को जबलपुर में इसके ढाई सौ डोज हेलीकॉप्टर के माध्यम से भेजे गई, जिन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहुंचाया गया है, क्योंकि यहां पर ब्लैक फंगस के सबसे ज्यादा मरीज भर्ती हैं।
मध्यप्रदेश में सबसे पहला कोरोना मरीज जबलपुर में सामने आया था। इसी तरह ब्लैक, व्हाइट और क्रीम फंगस के सबसे पहले मामले मरीज जबलपुर में पाए गए हैं। कोरोना वायरस का असर तो फिलहाल कम हो गया है लेकिन अब इसके बाद के साइड इफेक्ट लोगों को परेशान कर रहे हैं। फंगल इंफेक्शन के अलावा कई बैक्टीरियल इनफेक्शन भी कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीजों के शरीर में देखे जा रहे हैं।






