MP: कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, अनुकंपा नियुक्ति पर ताजा अपडेट, नई शर्त निर्धारित

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जबलपुर, डेस्क रिपोर्ट।केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण, कैट ने शासकीय कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, इसके तहत कोई भी संतान केवल तभी कर्मचारी की अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र मानी जाएगी जब कर्मचारी की मृत्यु के समय उस पर आश्रित हो।

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दरअसल, केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) जबलपुर के समक्ष रेलवे कर्मचारी की पुत्री विदिशा निवासी यशवंती सुनानी की ओर से अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा प्रस्तुत किया गया था, जिस पर कैट के न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर की एकलपीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया है।

सबसे पहले साल 2021 में रेलवे कर्मी की मृत्यु के बाद सबसे पहले उनकी पत्नी शिवरती बाई ने आवेदन किया था, लेकिन मेडिकल आधार पर उनका दावा खारिज हो गया। इसके बाद वर्ष 2003 में शिवरती की मृत्यु के बाद बेटे मदन ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान 2013 में उसकी भी मृत्यु हो गई। इसके बाद पति की मौत के बाद बहन यशवंती ने आवेदन पेश किया और रेलवे के आदेश को चुनौती दी।

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रेलवे की ओर से अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। बताया कि जब यशवंती ने आवेदन दिया, तो वह पति के साथ रह रही थी। उसके पति की बाद में मृत्यु हुई है, ऐसे में वह पिता के आश्रित कैसे हुई। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने इस तर्क को उचित माना। निर्धारित किया गया कि आवेदक यशवंती को अपने पति के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार है परंतु पिता के स्थान पर नहीं।
इसके बाद केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण, कैट के न्यायिक सदस्य रमेश सिंह ठाकुर की एकलपीठ ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी संतान केवल तभी कर्मचारी की अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र मानी जाएगी जबकि वह कर्मचारी की मृत्यु के समय उस पर आश्रित हो।कैट ने रेलवे के 7 अगस्त 2015 के आदेश को सही ठहराया है, जिसमें आवेदिका के अनुकंपा नियुक्ति के दावे को निरस्त कर दिया गया था।

 

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Pooja Khodani
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