जबलपुर जिले के चरगवां स्थित शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक स्कूल में सरकारी पैसों के इस्तेमाल को लेकर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। दरअसल RTI से मिले दस्तावेजों और विभागीय जांच में राष्ट्रीय पर्व पर पेड़ों की जगह लड्डू बांटने, सफाईकर्मी के नाम पर पुताई से लेकर नल कनेक्शन तक के बिल लगाने और ऐसे कामों का खर्च दर्ज करने के आरोप सामने आए हैं, जो मौके पर नहीं मिले। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने के बाद कलेक्टर ने तत्कालीन प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।
दरअसल मामला अहमदपुरा चरगवां निवासी दुर्गेश चढ़ार की शिकायत के बाद सामने आया। उन्हें स्कूल के खर्चों में गड़बड़ी का शक हुआ जिसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार यानी RTI के जरिए दस्तावेज हासिल किए। रिकॉर्ड में छात्रों को बिरयानी और रसगुल्ले खिलाने से लेकर स्कूल परिसर में पौधों की सजावट और कई निर्माण कार्यों तक का खर्च दर्ज मिला। दूसरी ओर स्कूल की छत जर्जर होने और टॉयलेट के दरवाजे टूटे होने की बात भी सामने आई। शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग ने जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट दिसंबर 2024 में सौंपी गई थी।
सफाईकर्मी के नाम पर कई काम दर्ज
वहीं दस्तावेजों के मुताबिक स्कूल के दैनिक वेतनभोगी सफाईकर्मी हीरालाल झारिया के नाम पर मजदूरी, पुताई, पेंटिंग, मिट्टी समतल करने, वॉशरूम बनाने, नल कनेक्शन और फूलों से सजावट जैसे अलग-अलग कामों के बिल दर्ज किए गए। प्यून और अन्य कर्मचारियों के नाम पर भी कई कामों का भुगतान दिखाया गया। शिकायत में सवाल उठाया गया कि सफाईकर्मी और प्यून के नाम पर ऐसे तकनीकी काम कैसे दर्ज हुए जिनके लिए अलग तरह के संसाधन और कामगारों की जरूरत होती है।

दरअसल रिकॉर्ड में जूता-चप्पल स्टैंड के लिए 8 हजार रुपए का बिल भी शामिल है। इसके अलावा नलकूप से मोटर निकलवाने के नाम पर 7,500 रुपए देने का उल्लेख है। बच्चों के हाथ धोने के प्लेटफॉर्म के निर्माण पर लाखों रुपए खर्च दिखाए जाने से जुड़े दस्तावेज भी सामने आए। वहीं चबूतरे की पुताई और पेड़ों की सफाई के लिए हीरालाल, आशीष और अतुल के नाम पर 3,600 रुपए, पाइप की पुताई के लिए 1,000 रुपए, कमरों की छपाई के लिए 4,100 रुपए और झाड़ियों की सफाई के लिए 1,500 रुपए का भुगतान दर्ज बताया गया। इन खर्चों को लेकर शिकायतकर्ता ने जांच की मांग की थी।
जयपुर से प्रिंटर इंक खरीदने तक के बिल
वहीं शिकायत में राष्ट्रीय पर्व पर बच्चों को पेड़े की जगह लड्डू बांटने का मामला भी उठाया गया। आरोप है कि शासन के निर्देश पेड़े बांटने के थे लेकिन स्कूल में लड्डू बांटे गए। सरकारी रिकॉर्ड में छात्रों को बिरयानी और रसगुल्ले खिलाने का खर्च भी दर्ज मिला। इसके अलावा जयपुर से प्रिंटर इंक खरीदने का बिल संदेह के घेरे में आया। स्कूल परिसर में गमलों में पौधे लगाकर सजावट करने का खर्च भी कागजों में दिखाया गया जबकि शिकायत के मुताबिक मौके पर ऐसी सजावट नहीं मिली।

इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर एक साल के भीतर मोनू इलेक्ट्रिक के नाम से टेंट के पांच बिल भी दर्ज किए गए, जिनकी कुल रकम 5,300 रुपए बताई गई है। इन सभी खर्चों और कामों को लेकर शिकायतकर्ता ने फरवरी 2023 में शिक्षा विभाग को दस्तावेजों के साथ शिकायत दी थी। इसके बाद तत्कालीन संयुक्त संचालक अरुण कुमार इंगले से जांच कराई गई। दिसंबर 2024 में सौंपी गई जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने की बात सामने आई। इन दस्तावेजों के आधार पर स्कूल में सरकारी रकम के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं। मामले की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कमिश्नर धनंजय सिंह को पत्र लिखकर तत्कालीन प्राचार्य भगवान सिंह पटेल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। अब इस मामले में आगे का फैसला कमिश्नर स्तर से लिया जाएगा।






