मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के बेलखाड़ू इलाके से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिला प्रशासन द्वारा एक युवक की संदिग्ध मौत के बाद सील किए गए ‘अश्वनी अस्पताल’ की जब ड्रग इंस्पेक्टर पुलिस और बीएमओ की मौजूदगी में दोबारा जांच की गई, तो वहां भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं और गंभीर बीमारियों में काम आने वाली सामग्रियां बरामद हुईं।
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि बिना किसी डॉक्टर की डिग्री के लंबे समय से बेलखाड़ू में यह अस्पताल अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। मंगलवार शाम को जब प्रशासनिक टीम ने अस्पताल की तलाशी ली, तो वहां से लगभग 12 हजार रुपये की अवैध और एक्सपायरी दवाएं जब्त की गईं।
बंगाली डॉक्टरों का डिप्लोमा लेकर एलोपैथिक इलाज कर रही थी संचालिका
शुरुआती जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के अस्पताल चला रही सरिता साहू मरीजों का इलाज एलोपैथिक अंग्रेजी दवाओं से करती थी। पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल में पता चला कि उसने केवल तथाकथित बंगाली डॉक्टरों वाला एक छोटा डिप्लोमा लिया था। बिना पक्के ज्ञान और डिग्री के वह सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही थी, जिसके गंभीर परिणाम एक युवक की मौत के रूप में सामने आए।
पेट दर्द के बाद अस्पताल पहुंचे युवक की ड्रिप चढ़ाने से हुई थी मौत
यह पूरा मामला तब खुला जब बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ला निवासी 19 वर्षीय शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को अचानक पेट में तेज दर्द उठा। परिजन उसे फौरन इलाज के लिए खैरी गांव स्थित इसी अश्वनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां सुबह तक उसका इलाज किया गया और फिर उसे घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी हालत फिर बिगड़ गई और उसके हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी।
एक्सपायरी ग्लूकोज और इंजेक्शन मिलने से गहराया लापरवाही का शक
परिजनों का आरोप है कि जब शेखर को दोबारा अस्पताल लाया गया, तो सरिता साहू के कहने पर मददगार सतीश साहू ने उसके हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए। अगले दिन फिर से उसे इंजेक्शन देने के साथ ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई, जिसके महज आधे घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। मौके से मिली ग्लूकोज की बोतल पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज पाई गई है।
ड्रग इंस्पेक्टर और पुलिस की टीम ने की एक घंटे तक सघन जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल, बीएमओ डॉक्टर श्रीपति मिश्रा और बेलखाड़ू चौकी प्रभारी अमित मिश्रा ने दल-बल के साथ अस्पताल पहुंचकर करीब एक घंटे तक ताबड़तोड़ जांच की। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि अस्पताल के अंदर से 23 प्रकार की अंग्रेजी दवाएं मिली हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई दवाएं और ग्लूकोज की बोतलें सीधे तौर पर छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दी जाती थीं।
जांच के दायरे में अस्पताल संचालिका, पुलिस तलाश में जुटी
प्रशासन की इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान बार-बार बुलाए जाने के बावजूद अस्पताल की अवैध संचालिका सरिता साहू मौके पर नहीं पहुंची। पुलिस ने अस्पताल के अंदर से आधी भरी ग्लूकोज की बोतल, सिरिंज, निडिल, इंजेक्शन की खाली शीशियां और दवाइयों के तमाम रैपर जब्त कर लिए हैं। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की परतें टटोलने में जुटा है और फरार संचालिका की तलाश तेज कर दी गई है।
वंदना झा की रिपोर्ट






