केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जबलपुर खंडपीठ ने आज एक महत्वपूर्ण मामले में आवेदकों को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े किए। यह मूल आवेदन एडिशनल एसपी जितेन्द्र सिंह, सत्येंद्र सिंह तोमर एवं मुकेश कुमार वैश्य द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसमें उन्होंने 56 वर्ष की आयु सीमा पार कर जाने के बावजूद, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में अपने अभ्यर्थित्व पर विचार किए जाने की मांग की थी।
आवेदन में यह प्रमुख रूप से कहा गया कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में किए जाने वाले अनिवार्य कैडर रिव्यू में अत्यधिक विलंब हुआ, कैडर रिव्यू वर्ष 2018 में होना था जिसे 2022 में किया गया, 4 वर्ष की देरी से किया गया, जिसके कारण आवेदक निर्धारित आयु सीमा पार कर गए और उनके वैधानिक अधिकार प्रभावित हुए।
8 वर्ष की सेवा के बाद मिलना था IPS कैडर, 26-27 वर्ष में भी नहीं मिला
आवेदकों का तर्क है कि 8 वर्ष की सेवा उपरांत वह नियमानुसार भारतीय पुलिस सेवा मैं चयनित किए जाने की पात्रता रखते है परंतु 26-27 वर्ष की सेवा के बाद भी वह चयनित नहीं हो पाए है । यदि कैडर रिव्यू समय पर किया जाता, तो वे आयु सीमा के भीतर रहते हुए चयन प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र होते।
CAT ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किये
आवेदकों की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे ने पैरवी करते हुए यह दलील दी कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा आवेदकों को नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने न्यायालय के समक्ष यह भी प्रस्तुत किया कि यह देरी पूरी तरह से सरकारी तंत्र की विफलता है, न कि आवेदकों की। अधिकरण ने प्रथम दृष्टया आवेदकों के पक्ष में मामला बनता हुआ पाते हुए उन्हें अंतरिम राहत प्रदान के रूप में कार्यवाही यथास्थित बनाये रखने के आदेश पारित किया और केंद्र एवं राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।




