मध्यप्रदेश में डायल 112 के ठेके को लेकर हाई कोर्ट में दायर याचिका पर आज सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने कहा कि सिकंदराबाद की ईएमआई (ग्रीन हेल्थ सर्विस) को दिया गया ठेका बरकरार रहेगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि ठेके में कोई भी तथ्यात्मक गड़बड़ी नहीं है, लिहाजा टेंडर प्रक्रिया पर लगाए गए आरोपों से हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
BVG इंडिया लिमिटेड कंपनी ने आरोप लगाए थे कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मध्य प्रदेश में डायल 112 का टेंडर दिया गया था, जो कि तकरीबन 972 करोड़ रुपए का है। याचिकाकर्ता ने टेंडर की शर्तों में गड़बड़ी और 972 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से चलने वाली डायल 112 के चलन पर भी आरोप लगाए थे, जिस पर कोर्ट ने ‘मर्सिडीज’ चलाने जैसी भी की टिप्पणी थी। बता दें BVG इंडिया लिमिटेड कंपनी जिसने कि पहले 10 साल तक सेवाएं दे चुकी है।
सरकार की दलीलों से सहमत दिखी अदालत
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ठेका प्रक्रिया पूरी तरह से वैध है। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि ठेके में कोई भी तथ्यात्मक गड़बड़ी नहीं की गई है, और जो भी आरोप लगाए गए हैं वह पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जिन दस्तावेजों को लेकर आरोप लगाए गए हैं वह सिर्फ पॉइंट 5% है और इसके लिए 972 करोड रुपए का ठेका निरस्त नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट की डबल बेंच ने दिया ये फैसला
972 करोड़ रुपए के डायल 112 के ठेके से जुड़े मामले पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की दलीलों को सही मानते हुए कहा कि जिस कंपनी को डायल 112 का टेंडर दिया गया है वह सही है और कानून के अनुरूप ही रहेगा।





