पुलिस इंस्पेक्टर की बहाली के आदेश पर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने लगाई रोक, महिला कर्मचारी के साथ अमर्यादित व्यवहार का है मामला

हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 19 फरवरी 2026 को इस आधार पर बर्खास्तगी रद्द कर दी थी कि सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और जांच न करने के पर्याप्त कारण नहीं बताए गए।
Jabalpur HC

Jabalpur HC

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर डबल बेंच ने एकल पीठ के एक आदेश को रद्द करते हुए एक पुलिस अधिकारी की बर्खास्तगी से बहाली के आदेश पर रोक लगा दी है, मामला एक महिला कर्मचारी के साथ अमर्यादित और अशोभनीय व्यवहार से जुड़ा है ।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस संजीव संचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने पुलिस विभाग के निरीक्षक (रेडियो) राजेश कुमार त्रिपाठी की बर्खास्तगी को रद्द करने वाले एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है ।यह मामला डायल-100 (अब डायल 112) कंट्रोल रूम में एक महिला कर्मचारी के साथ किए गए अशोभनीय और अपमानजनक व्यवहार से संबंधित है।

गौरतलब है कि निरीक्षक राजेश कुमार त्रिपाठी, जो भोपाल स्थित डायल-100 कंट्रोल रूम में तैनात थे, जिन पर आरोप है कि 30-31 अगस्त 2025 की मध्यरात्रि को शिफ्ट सुपरवाइजर के रूप में कार्य करते समय उन्होंने एक निजी महिला कॉल ऑपरेटर के साथ अत्यंत अमर्यादित कृत्य किया था।

पुरुष कर्मचारियों के मुंह सूंघने का दिया था आदेश 

आरोप है कि इंस्पेक्टर त्रिपाठी ने महिला ऑपरेटर को डिस्पैच हॉल के प्रवेश द्वार पर खड़ा कर पुरुष पुलिस अधिकारियों की मुंह (सांस)  सूंघने के लिए मजबूर किया ताकि नशे की जांच का ढोंग किया जा सके। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई थी।

एकल पीठ ने बर्खास्तगी से बहाल करने का दिया था आदेश  

इस शर्मनाक घटना और त्रिपाठी के पिछले खराब सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) का उपयोग करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था । प्राधिकारी का मानना था कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और डर के माहौल के कारण औपचारिक विभागीय जांच संभव नहीं थी । हालांकि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 19 फरवरी 2026 को इस आधार पर बर्खास्तगी रद्द कर दी थी कि सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और जांच न करने के पर्याप्त कारण नहीं बताए गए।

अपील में राज्य शासन ने दिए ये तर्क 

एकलपीठ के फैसले को राज्य सरकार ने खंडपीठ के समक्ष अपील दायर कर चुनौती दी जिसमें उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने तर्क दिया कि सीसीटीवी फुटेज जैसे पुख्ता सबूत होने और पीड़ित महिला कर्मचारियों के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ गवाही देने में डर और संकोच को देखते हुए विभागीय जांच की आवश्यकता को समाप्त करना संवैधानिक रूप से सही था ।  कोर्ट को सीसीटीवी फुटेज भी दिखाए गए, सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस बल के अनुशासन को बनाए रखने के लिए ऐसे गंभीर कदाचार पर कड़ी कार्यवाही आवश्यक है। खंडपीठ ने इन तर्कों पर विचार करते हुए एकल पीठ के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है ।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews