जबलपुर जिले के शहपुरा क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां स्थित बालाजी सॉल्यूशंस इथेनॉल फैक्ट्री में साबुत धान के ट्रक पहुंचने की शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में तो आया, लेकिन कार्रवाई का अंजाम लोगों को हैरान करने वाला रहा।
मुखबिर ने प्रशासन को बताया था कि इथेनॉल फैक्ट्री में बड़ी संख्या में धान और चावल से भरे ट्रक पहुंच रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार इथेनॉल उत्पादन के लिए नीलामी में केवल खराब धान या मक्का की खरीद-फरोख्त ही की जा सकती है। इस शिकायत के बाद एसडीएम और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया।
शिकायत मिलते ही मौके पर पहुंची एसडीएम और पुलिस की टीम
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही प्रशासन को सूचना मिली कि बालाजी सॉल्यूशंस इथेनॉल फैक्ट्री में साबुत धान के ट्रक लाए जा रहे हैं, एसडीएम के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ एक टीम फैक्ट्री परिसर पहुंची। यह कार्रवाई अचानक की गई थी, ताकि मौके की सच्चाई सामने आ सके।
टीम के पहुंचते ही फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने फैक्ट्री में प्रवेश कर जांच करने की कोशिश की लेकिन बताया जा रहा है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने एसडीएम को भीतर प्रवेश करने से भी रोक दिया।
मौके पर मिले धान और चावल से भरे 28 ट्रक
यहां अहम बात यह है कि इथेनॉल फैक्ट्री में साबुत धान या खाने योग्य चावल का उपयोग नियमों के तहत सवालों के घेरे में आता है। आमतौर पर एफसीआई या अन्य एजेंसियों द्वारा नीलामी में खराब धान या मक्का ही इथेनॉल उत्पादन के लिए दिया जाता है। ऐसे में साबुत धान और चावल से भरे ट्रकों की मौजूदगी ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।
जांच की जिम्मेदारी फैक्ट्री प्रबंधन को ही सौंप दी गई
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर 28 ट्रक पाए जाने के बावजूद एसडीएम की टीम ने खुद जांच आगे बढ़ाने के बजाय फैक्ट्री प्रबंधन को ही जांच की जिम्मेदारी सौंप दी। प्रबंधन को निर्देश दिए गए कि वह खुद ही पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करे और आवश्यक दस्तावेज प्रशासन को सौंपे।





