जबलपुर हाईकोर्ट की युगलपीठ ने EWS आरक्षण से जुड़े मामले में केंद्र सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या निजी मेडिकल कॉलेजों में सामान्य वर्ग की सीटें बढ़ाकर EWS छात्रों को समायोजित किया जा सकता है। इसी सुनवाई के दौरान IGNOU के DPE डिप्लोमा को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला बरकरार रखा गया, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है।
दरअसल जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ में दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। पहली याचिका अथर्व चतुर्वेदी बनाम मध्य प्रदेश शासन मामले से जुड़ी है, जो 2024 से लंबित है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि निजी मेडिकल कॉलेजों में सामान्य वर्ग के हितों को प्रभावित किए बिना सीटों की संख्या बढ़ाकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण पर क्या है मामला?
पहली याचिका में मुख्य सवाल निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण को लागू करने के तरीके को लेकर उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सामान्य कोटे की मौजूदा सीटें घटाने के बजाय सीटों की संख्या बढ़ाकर EWS छात्रों को आरक्षण दिया जा सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि इस तरह की व्यवस्था नियमों के तहत संभव है या नहीं। इसी सुनवाई के दौरान कुमारी दरक्षा अंजुम और अन्य की ओर से दायर दूसरी याचिका पर भी अदालत ने राज्य सरकार और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेजों की मौजूदा प्रवेश प्रक्रिया अंतिम न्यायिक फैसले के अधीन रहेगी। यानी फिलहाल प्रवेश प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन अंतिम निर्णय आने के बाद आगे की स्थिति तय होगी।
IGNOU DPE डिप्लोमा को हाईकोर्ट से राहत
वहीं इसी दिन हाईकोर्ट ने शिक्षकों और अभ्यर्थियों से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में भी फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से प्राप्त दो वर्षीय प्राथमिक शिक्षा डिप्लोमा (DPE) माध्यमिक शिक्षक पद पर सीधी नियुक्ति और पदोन्नति के लिए मान्य रहेगा। युगलपीठ ने राज्य सरकार की तीनों रिट अपीलों को खारिज करते हुए पहले की एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने 28 फरवरी 2013 को जारी भर्ती नियमों के परिपत्र में IGNOU के DPE को D.Ed और D.El.Ed के समकक्ष मान्यता दी थी। सुनवाई के दौरान सरकार ऐसा कोई आदेश या दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि बाद में यह मान्यता वापस ली गई थी।






