जबलपुर के शेल्बी हॉस्पिटल में रविवार को आग लगने की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल आग सेमी-प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर 315 में लगी थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इसकी वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। आग और धुआं फैलने के बाद अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों के बीच घबराहट फैल गई। कुछ ही देर में दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। नगर निगम की तीन दमकल गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
वहीं हादसे के समय कमरा नंबर 315 में दो मरीज मौजूद थे। इसी दौरान 83 वर्षीय जोगिंदर सिंह नारंग के पौत्र सुखनाम ने कमरे से धुआं उठते देखा और अस्पताल प्रबंधन को इसकी सूचना दी। जानकारी के मुताबिक उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरे मरीजों को बाहर निकालने में मदद की। इस दौरान उनके दो मोबाइल फोन, एयरपॉड्स और बुजुर्ग दादाजी की सुनने की मशीन आग में जल गई। घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गया।
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ICU के गंभीर मरीजों को सीढ़ियों से नीचे लाए
दरअसल आग लगने के बाद अस्पताल के ICU में भर्ती करीब 10 गंभीर मरीजों को बाहर निकालने के लिए कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। जानकारी के अनुसार मरीजों को गोद और कंधों पर उठाकर तीसरी मंजिल से सीढ़ियों के रास्ते नीचे लाया गया। इसके बाद उन्हें जल्दबाजी में पास के दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया ताकि उनका इलाज जारी रह सके।
रैंप की व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई
वहीं घटना के दौरान अस्पताल में मौजूद मरीजों, परिजनों और मेडिकल स्टाफ के बीच अफरा-तफरी का माहौल रहा। बहुमंजिला अस्पताल में मरीजों को तेजी से नीचे लाने के लिए रैंप की व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में गंभीर मरीजों को सीढ़ियों से नीचे लाना पड़ा। यह स्थिति खास तौर पर उन मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण थी जिन्हें खुद चलने-फिरने में परेशानी थी या जिन्हें लगातार मेडिकल देखभाल की जरूरत थी।
प्रबंधन ने आरोपों को नकारा
वहीं शेल्बी हॉस्पिटल में आग लगने की शुरुआती वजह कमरा नंबर 315 में शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि आग लगने के सही कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। घटना के बाद अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था, अलार्म सिस्टम और मरीजों को बाहर निकालने के इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन के प्रतिनिधि अंकित जैन ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बेडशीट और लकड़ी के कारण आग जरूर फैली, लेकिन अस्पताल की हॉज रील्स और दमकल विभाग की मदद से स्थिति पर काबू पा लिया गया था। प्रबंधन की ओर से आग बुझाने के लिए उपलब्ध इंतजामों का हवाला दिया गया है जबकि दूसरी ओर फायर अलार्म सिस्टम के ठप होने और रैंप नहीं होने जैसे आरोप सामने आए हैं।
