ज्वेलर्स संचालक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, छोड़ा सुसाइड नोट

ज्वेलर्स संचालक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, छोड़ा सुसाइड नोट

जबलपुर| संदीप कुमार| ‘मैं दुनिया छोड़कर जा रहा हूं आप सभी लोग दुकान का ख्याल रखना’। कुछ इस तरह का सुसाइड नोट लिखकर सर्राफा निवासी एक ज्वेलर्स संचालक ने आज दोपहर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक ज्वेलर्स संचालक का नाम अनिल सोनी बताया जा रहा है। दोपहर को जब अनिल सोनी के छोटे भाई जीतेन्द्र सोनी दुकान पहुंचे तो देखा कि दुकान के ऊपर उनके बड़े भाई ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। मरने से पहले मृतक अनिल सोनी ने एक सुसाइड नोट भी लिखा है जिसमें जिक्र किया गया है कि मैं आत्महत्या कर रहा हूं और आप लोग दुकान संभाल लेना।प्रथम दृष्टया पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि मृतक अनिल सोनी पैरालाइसिस की बीमारी से ग्रसित थे और काफी इलाज करवाने के बाद भी जब ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने यह घातक कदम उठाया है।फिलहाल पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है साथ ही परिजनों के बयान और सुसाइड नोट के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अचानक से अनिल सोनी का इस तरह से घातक कदम उठाने से परिवार पूरी तरह से आहत है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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