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लखनादौन नगर परिषद् में बड़ा भ्रष्टाचार, EOW ने अध्यक्ष सहित 23 पर दर्ज की एफआईआर

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Atul Saxena
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जांच में सामने आया कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा दुकानदारों से मिलीभगत कर बिना अनुबंध किये एवं नीलामी की बोली की पूरी राशि जमा कराये बिना ही दुकानदारों को दुकानों का कब्जा दे दिया है।

सिवनी जिले की लखनादौन नगर परिषद में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की दुकानों के आवंटन में एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। एक शिकायत की जांच में जबलपुर ईओडब्ल्यू ने 83 लाख रुपये का भ्रष्टाचार मिलने पर नगर परिषद की वर्तमान अध्यक्ष, दो पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और राजस्व उप निरीक्षक सहित कुल 23 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

बता दें जबलपुर आदर्श नगर निवासी रविन्दर सिंह आनंद की शिकायत की जांच पर से ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि नगर परिषद लखनादौन जिला सिवनी मे पदस्थ रहे सीएमओ एवं अध्यक्ष ने मिलीभगत करते हुए ना सिर्फ पद का दुरुपयोग किया, बल्कि शापिंग काम्प्लेक्स में निर्मित हुई दुकानों की प्रीमियम राशि लिए बिना ही दुकानों को आवंटित कर दिया।

नगर परिषद लखनादौन ने 8 शॉपिंग काम्प्लेक्स में 75 दुकानों का निर्माण कराया जिसके बाद उसकी नीलामी हेतु निविदा जारी की गई। सभी दुकानों की उच्चतम बोलियों की स्वीकृति प्रदान की गई थी। नीलामी के दौरान ही दुकानों के आरक्षण का नियम भी लागू किया गया था। आरक्षण रोस्टर में प्रत्येक काम्प्लेक्स में कौन से नम्बर की दुकान आरक्षित होंगी यह निर्धारित की गई थी।

नियमों के अनुसार 21 दिन के भीतर नीलामी की 25 प्रतिशत की राशि जमा की जाना थी और शेष राशि निविदा के अंतिम स्वीकृति के संबंध में लिखित सूचना प्राप्त होने के दिनांक से 120 दिन के अंदर जमा की जाना चाहिए थी। परिषद को सबंधित हितग्राही से एक अनुबंध तैयार किया जाना था, जिसमें नगर परिषद द्वारा दुकान की प्रति माह लिए जाने वाली किराये की राशि का भी वर्णन होता है।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा 

लेकिन जांच में सामने आया कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा दुकानदारों से मिलीभगत कर बिना अनुबंध किये एवं नीलामी की बोली की पूरी राशि जमा कराये बिना ही दुकानदारों को दुकानों का कब्जा दे दिया है। सत्यापन में यह भी पाया गया कि 32 दुकानों में से 13 दुकानदारों ने नीलामी की राशि लगभग 79,82,500/-रु. जमा ही नहीं की है, और परिषद से अनुबंध किये बिना ही दुकानें संचालित कर रहे है। इन दुकानदारों से नियमानुसार किराये की राशि भी वसूल नहीं की गयी है, जो लगभग 2,88,000/-रुपये होती है।

इन अफसरों पर दर्ज हुई एफआईआर

  • मीणा बलराम गोल्हानी (नगर परिषद अध्यक्ष)
  • गजेन्द्र पाण्डे (तत्कालीन सीएमओ)
    गीता वाल्मीक (तत्कालीन सीएमओ)
  • रवि झारिया/गोल्हानी (राजस्व उप निरीक्षक)
  • पीआईसी सदस्य: देवकी शिवकुमार झारिया, संगीता संजय गोल्हानी, वर्षा श्रीकांत गोल्हानी, अनीता संदीप जैन और सविता गोलू कुमरे।

इन दुकानदारों पर मामला दर्ज

अधिकारियों के भ्रष्टाचार  में शामिल दुकानदार भागचद्र अहिरवार, तेजस्व जैन, शेलेन्द्र उर्फ सोनू यादव, सीमा गोल्हानी, संगीता गोल्हानी, बुलबुल जैन, खूबचंद चैाकसे, सतीश उइके , देवेन्द्र राय श्रीवास्तव, सतेन्द्र विश्वकर्मा, गणेश पटेल ,विकास नामदेव एवं शिवप्रसाद गोल्हानी को भी ईओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार, इस पूरे मामले में आपसी मिलीभगत से शासन के राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई गई है। फिलहाल मामले की विस्तृत विवेचना जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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