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अतिरिक्त लोक अभियोजक को लोकायुक्त पुलिस ने 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

Written by:Atul Saxena
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अतिरिक्त लोक अभियोजक कुक्कू दत्त ने शिकायतकर्ता बिहारी लाल को रिश्वत के 15 हजार रुपए लेकर अपने घर सिविल लाइन स्थित घर बुलाया, तभी पीछे से आकर लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथों उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
अतिरिक्त लोक अभियोजक को लोकायुक्त पुलिस ने 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को जिला कोर्ट में पदस्थ अतिरिक्त लोक अभियोजक को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। सरकारी वकील का नाम कुक्कू दत्त है जो शिकायतकर्ता से पुनः अपील दायर करवाने के लिए दस्तावेजों में साइन करने हेतु रिश्वत मांग रही थी।

लोकायुक्त पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता बिहारी लाल रजक कई दिनों से  लोक अभियोजक के चक्कर काट रहा था लेकिन वे बिना पैसे लिए काम करने को तैयार नहीं थी, जिसकी शिकायत उसने जबलपुर लोकायुक्त एसपी से की थी।

शिकायत का परीक्षण करवाने के लिए लोकायुक्त एसपी ने टीम को निर्देश दिए जिसमें आज अतिरिक्त लोक अभियोजक कुक्कू दत्त ने बिहारी लाल को रिश्वत के 15 हजार रुपए लेकर जब घर सिविल लाइन स्थित घर बुलाया, रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप प्लान की गई।

रिश्वत की राशि हाथ में आते ही लोकायुक्त ने पकड़ा 

प्लान के मुताबिक आवेदक के साथ लोकायुक्त की टीम भी सरकारी वकील के घर पहुंची और छिप गई और फिर जैसे ही आवेदक ने घर के अन्दर जाकर कुक्कू दत्त को रिश्वत की राशि 15 हजार रुपए दी वैसे ही लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारकर उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

इसलिए सरकारी वकील ने मांगी रिश्वत 

सिविल लाइन निवासी शिकायतकर्ता बिहारी लाल रजक का कहना है कि वर्ष 2022 में उसने एक अपराध पंजीकृत करवाया था, जिसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विचारण के बाद प्रकरण में आरोपी को बेगुनाह साबित कर दिया था। इस पूरे प्रकरण में बिहारी लाल रजक की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कुक्कू दत्त ने पैरवी की थी। कोर्ट ने जब आरोपी को दोषमुक्त कर दिया तो शासन की तरफ से अपील हेतु कुक्कू दत्त को आदेश प्राप्त हुए थे, जिसकी अपील प्रार्थी के पक्ष में बनाने हेतु बिहारी लाल रजक से सरकारी वकील 15000 रुपए रिश्वत मांग कर रही थी।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट  

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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