MP News : 23 हज़ार ग्राम रोजगार सहायकों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने दिए ट्रांसफर अलाउंस, HRA देने के निर्देश

हाई कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों को आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ट्रांसफर अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस देने के लिए छह महीने के भीतर नीति बनाई जाए।
MP High Court Jabalpur

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मध्यप्रदेश के करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के लिए जबलपुर हाई कोर्ट से बड़ी खबर सामने आई है। हाई कोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें ट्रांसफर अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA देने के लिए नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह महीने के भीतर इस संबंध में नीति तैयार करने का आदेश दिया है। हालांकि, ग्राम रोजगार सहायकों की तबादले नहीं किए जाने की मांग को हाई कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।

यहाँ बता दें 5 ग्राम रोजगार सहायकों ने 2025  एक याचिका हाई कोर्ट में दायर की थी, जिसमें सुनवाई चल रही थी, बीती 18 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हो गई थी लेकिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे अब सुनाया गया है,  सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि अक्रिब 18000/- रुपये मासिक वेतन पाने वाले ग्राम रोजगार सहायकों का यदि दूर दराज ट्रांसफर हो जाता है तो उन्हें आर्थिक परेशानियाँ उठानी पड़ सकती है।

अदालत ने दिया ट्रांसफर अलाउंस और HRA देने का निर्देश 

कोर्ट ने याचिका में बताई गई परेशानियों पर संवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा यह भी कहा कि चूंकि स्थानांतरण प्रशासनिक और सरकार की सुविधा के लिए किया जाता है, इसलिए कर्मचारियों को इसका आर्थिक मुआवजा या भत्ते मिलने चाहिए। अदालत ने सभी बिन्दुओं पर विचार करने के बाद ट्रांसफर अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस देने के निर्देश दिए।

छह महीने के भीतर नीति बनाने के निर्देश 

हाई कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश के करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों को आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ट्रांसफर अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस देने के लिए छह महीने के भीतर नीति बनाई जाए। इसके लिए राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, रोजगार सहायकों को तबादलों से छूट देने की मांग कोर्ट ने खारिज कर दी। यानी तबादले नहीं करने की मांग को राहत नहीं मिली, लेकिन भत्तों के मामले में हाई कोर्ट ने नीति बनाने का निर्देश देकर कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है।

वन्दना झा की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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