लॉकडाउन में दूर से साफ दिख रही नर्मदा अभी भी हो रही प्रदूषित

लॉकडाउन में दूर से साफ दिख रही नर्मदा अभी भी हो रही प्रदूषित

जबलपुर| संदीप कुमार| कोरोना काल मे लगे लॉक डाउन के बाद नर्मदा नदी साफ और शुद्ध हो गई है ये भले ही लोगो को दिख रहा है पर असल मे हकीकत कुछ और ही है। आज भी नर्मदा नदी की सहायक गौर और परियट नदी से गोबर और गंदगी नर्मदा में मिल रही है। यह खुलासा किया है जबलपुर के कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी ने। कमिश्नर ने बताया कि आज हम भले ही लग रहा है कि लॉक डाउन में लोगो के घाट पर न जाने से नर्मदा साफ हो गई है पर हकीकत में ऐसा नही है। अगर हम गौर से देखे तो पता चलता है कि लॉक डाउन में नर्मदा नदी इंसानो से नही बल्कि सहायक नदियों के कारण प्रदूषित हो रही है।

प्रदूषण फैलाने वाली डेरियों के खिलाफ होगी कार्यवाही…..
कमिश्नर महेशचंद्र चौधरी ने बताया कि अब डेरियों का गंदा पानी गौर ओर परियट नदी के माध्यम से नर्मदा में न जाये इसको लेकर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और नगर निगम की टीम बनाई जाएगी जो कि ऐसे लोगो के खिलाफ कार्यवाही करेगी जो कि नदियों को प्रदूषित कर रहे है।

गौर और परियट नदी के बाद अब नर्मदा को भी डेरी कर रही है प्रदूषित..
कमिश्नर ने बताया कि गौर और परियट नदी के आसपास डेरियों का सालों से जमावड़ा लगा हुआ है इन्ही डेरियों के कारण नर्मदा की सहायक नदियां प्रदूषित हुई और अब नर्मदा नदी तक गोबर पहुँच रहा है जिसके कारण नर्मदा भी प्रदूषित हो रही है।अब भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए जिला प्रशासन तैयार कर नदियों में आना वाले गंदे पानी की रोकथाम के लिए प्लान बनाएगा साथ ही डेरियों पर कार्यवाही भी की जाएगी

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews