विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए बिजली का नया टैरिफ जारी कर दिया है, जिसमें 4.80% की वृद्धि की गई है। लिहाजा प्रदेश के 1.90 करोड़ उपभोक्ताओं के बिलों में अब जल्द ही असर देखने को मिलेगा। उधर इसका विरोध शुरू हो गया है।
मध्यप्रदेश नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच का कहना है कि राज्य सरकार प्रदेश की जनता के साथ छलावा कर रही है। जो बिजली सामान्य उपभोक्ताओं को 7.05 रुपए दे रही है, वही बिजली प्रदेश के बाहर सिर्फ 3.81 रुपए में बेच रही है। मंच ने मुख्यमंत्री के नाम आज अपनी एक शिकायत देते हुए बिजली के बढ़े हुए दामों को वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस और ध्यान नहीं देती है, तो पूरे प्रदेश मे लगातार आंदोलन किया जाएगा।
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मध्य प्रदेश में महंगी हुई बिजली
बता दें 26 मार्च को राज्य सरकार ने बिजली के नए बढ़े हुए दाम जारी कर दिए है, जो एक अप्रैल से प्रभावी होंगे। आयोग ने अपनी टैरिफ लिस्ट में यह भी जिक्र किया है कि बाहर दूसरे राज्यों को जो बिजली दी जाएगी, उसकी कीमत 3.81 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बेची जाएगी। आयोग के ही आदेश में प्रदेश की जनता के लिए 7.05 रुपए प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है।
उपभोक्ताओं को महंगी बिजली दिए जाने का दावा
255 पेज की टैरिफ आदेश के पेज नंबर 76 में जो तालिका दी गई है, उसमें साफ समझ में आ रहा कि राज्य सरकार सरप्लस बिजली सस्ती बेच रही है, जबकि आम जनता को यही बिजली डबल रेट में दी जा रही है। आयोग की रिपोर्ट में यह भी दिया गया है कि 10.198.02 मिलियन यूनिट बिजली सरप्लस है।
प्रदेश की जनता के साथ हो रहा अन्याय
मंच के अध्यक्ष डां पी.जी नाजपांडे का कहना है कि प्रदेश की जनता के साथ अन्याय हो रहा है और उन्हें मंहगे दामों में बिजली दी जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार यह जानती है कि अभी चुनाव नहीं होने है, लिहाजा अगर दाम बढ़ भी जाएंगे, तो इसका विरोध करने से कुछ नहीं होगा। नाजपांडे ने बताया कि यह सब करने के पीछे सरकार की मंशा है कि जनता से ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूल किया जाए।
उनका कहना है कि सरकार ने निजी कंपनियों के अलावा दूसरे राज्यों से भी एमयू बिजली के लिए साइन करती है। उन्होंने बताया कि पीक समय जो कि अधिकतर गर्मी में होता है, उस समय बिजली की मांग प्रदेश में बढ़ जाती है, जिसकी पूर्ति के लिए एमयू साइन किए जाते है। एक समय पर सरकार अगर उस बिजली को खर्च नहीं कर पाती है, तो भी एमयू के तहत उस बिजली के दाम सरकार को चुकाने ही होंगे , यही वजह है कि उस घाटे की पूर्ति के लिए दूसरे राज्यों को सरकार कम दाम में बिजली बेचती है और प्रदेश की जनता के लिए दाम बढ़ाकर अधिक रुपए वसूल करती है।