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एप पर नहीं लगाई e Attendance, विभाग ने थमा दिया नोटिस, शिक्षक ने दिया ऐसा जवाब हो गया वायरल

Written by:Atul Saxena
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शिक्षिका ज्योति पांडे ने बिन्दुवार जवाब देते हुए अंत में लिखा कि मेरे इन्हीं बिन्दुओं के आधार पर ई अटेंडेंस मामले पर याचिका विचारार्थ स्वीकृत और प्रक्रियाधीन है। 
एप पर नहीं लगाई e Attendance, विभाग ने थमा दिया नोटिस, शिक्षक ने दिया ऐसा जवाब हो गया वायरल

मध्य प्रदेश सरकार तकनीक के इस दौर में विभागीय स्तर पर खुद को अपडेट करती जा रही है, इसी क्रम में स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक एप पर ई अटेंडेंस लगाना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन कुछ शिक्षक इस आदेश का पालन नहीं कर रहे। ऐसे ही एक शिक्षक को प्रिंसिपल ने जब नोटिस थमाया तो उसने जवाब दिया लेकिन जवाब में जो लिखा उसके कारण अब वो वायरल हो रहा है।

मामला जबलपुर जिले के शासकिय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महाराजपुर पनागर की उच्च माध्यमिक शिक्षक ज्योति पांडेय से जुड़ा है,  उन्हें शिक्षक एप पर ई अटेंडेंस नहीं लगाने पर स्कूल प्रिंसिपल ने कारण बताओ नोटिस थमाया है, नोटिस में लिखा कि “वरिष्ठ कार्यालय द्वारा जानकारी में यह देखा गया है कि आपके द्वारा हमारे शिक्षक एप पर ई अटेंडेंस (e Attendance) नहीं लगाई जा रही है जबकि शासन के द्वारा समस्त लोक सेवकों को ई अटेंडेंस लगाना अनिवार्य किया गया है। अतः आप इस विषय में अपना स्पष्टीकरण तत्काल कार्यालय में प्रस्तुत करें।

e Attendance नहीं लगाने पर शिक्षिका को थमाया नोटिस 

स्कूल प्रिंसिपल की तरफ से शिक्षिका ज्योति पांडे को 17 अक्टूबर को नोटिस दिया गया जिसका जवाब उन्होंने 20 अक्टूबर को दिया, लेकिन जिस तरह से उन्होंने बिन्दुवार जवाब लिखा है अब वो जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, ज्योति ने लिखा कि आपके द्वारा भेजा गया पत्र मुझे 17 अक्टूबर को विद्यालय समय समाप्ति के कुछ समय पहले ही मिला, चूँकि 18 से 23 अक्टूबर तक छुट्टी है इसलिए मैं आज 20 अक्टूबर को आपको जवाब व्हाट्सएप पर फोटो के रूप में भेज रही हूँ ।

ज्योति पांडे का बिन्दुवार जवाब 

  • वर्तमान में मेरे पास जो एन्ड्रोयड फोन है वह शासन द्वारा नहीं दिया गया है बल्कि वो मेरा निजी फोन है
  • मेरे पर्सनल फोन में मेरी निजी जानकारी, फोटो, व्यक्तिगत, वित्तीय जानकारी आदि होती है।
  • शासन द्वारा फोन के डेटा और साइबर क्राइम से सुरक्षा के आश्वासन व क्षतिपूर्ति  के आश्वासन के बिना किसी थर्ड पार्टी एप को फोन की एक्सेस देना संभव नहीं हैं।
  • शासन को किसी एप के माध्यम से मेरी लोकेशन, कैमरा, फोटो की एक्सेस देने से “मेरे निजता के मौलिक अधिकार” का उल्लंघन होता है।
  • मेरा निजी फोन हर समय मेरे पास नहीं होता है और इसे मुझे कभी कभी पुत्री के अध्ययन कार्य हेतु घर छोड़ना होता है।
  • मेरी प्रोफाइल में दर्ज मेरे नंबर की सिम मेरे आधार और बैंक खाते से लिंक है और इसकी एक्सेस देने से वित्तीय धोखाधड़ी की संभावना होती है।
  • यदि शासन द्वारा मुझे अलग सिम और मोबाइल दिया जाता है तो उससे इस एप का उपयोग किया जा सकता है
  • उक्त बिन्दुओं के अनुसार एक याचिका उच्च न्यायालय विचारार्थ स्वीकृत और प्रक्रियाधीन है। 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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