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सोम डिस्टिलरीज लाइसेंस रद्द मामला: हाई कोर्ट के एक और जज ने सुनवाई से किया इंकार, नई बेंच करेगी फैसला

Reported by:Sandeep Kumar|Edited by:Atul Saxena
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सोम डिस्टिलरीज लाइसेंस रद्द मामले में हाई कोर्ट के एक और जज संदीप भट्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया इससे पहले सोमवार को जस्टिस विशाल मिश्रा ने सुनवाई से खुद को अलग करने का फैसला लिया था।
सोम डिस्टिलरीज लाइसेंस रद्द मामला: हाई कोर्ट के एक और जज ने सुनवाई से किया इंकार, नई बेंच करेगी फैसला

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मध्य प्रदेश की सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस रद्द मामले में आज शुक्रवार को एक बार फिर नया घटनाक्रम सामने आया है, अब एक और जज ने मामले की सुनवाई से इंकार कर दिया है, हाई कोर्ट जज संदीप भट्ट ने अपनी बैंच में केस नहीं  लगाने के निर्देश दिए हैं, बता दें बीते सोमवार को जस्टिस विशाल मिश्रा ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

बीते सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला। हाई कोर्ट में चल रहे सोम डिस्टलरी लाइसेंस सस्पेंड मामले की सुनवाई से जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने ये फैसला सुनवाई शुरू होते ही सुनाया, उल्लेखनीय है कि सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड ने अपने लाइसेंस को रद्द करने के सरकारी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है जिसकी सुनवाई बेंच को करनी है।  उनके इस फैसले के बाद अब इस केस को किसी दूसरी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।

जस्टिस संदीप भट्ट ने किया सुनवाई से इंकार 

लेकिन आज शुक्रवार को जस्टिस संदीप भट्ट ने सोम डिस्टिलरीज़ की याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया, जस्टिस संदीप भट्ट ने अपनी बेंच में केस ना लगाने के निर्देश दिए, अब हाईकोर्ट प्रशासन केस लिस्टिंग पर फैसला लेगा कि याचिका की सुनवाई कौन सी बेंच करेगी।

इसलिए जज लेते हैं इस तरह के निर्णय 

उल्लेखनीय है कि दोनों जजों ने सुनवाई ना करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया है लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तरह के संभावित हित-संघर्ष की आशंका से बचने या निष्पक्षता पर सवाल न उठे, इसके लिए न्यायाधीशों द्वारा खुद को मामलों से अलग करना एक स्थापित न्यायिक प्रक्रिया है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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