भोपाल। मुम्बई के भायकुला से एआईएमआईएम विधायक वारिस पठान के विवादास्पद बयान की मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिह ने कङी निन्दा की है।वारिस पठान ने कहा था” आजादी लेनी पड़ेगी। जो चीज़ मांगने से नहीं मिलती है तो उसे छीन कर लेना पड़ेगा। ये भी याद रखना अब वक्त आ गया है। हमको बोला मां – बहिनों को आगे भेज दिया औऱ खुद कंबल में बैठ गए। अरे भाई अभी तो शेरिनियां बाहर निकली हैं तो तुम्हारे पसीने छूट गए औऱ समझ लो अगर हम लोग साथ आए गए तो क्या होगा। 15 करोड़ हैं लेकिन एक सौ पर भारी हैं याद रख लेना ये बात “इस पर जयवर्धन ने ट्विट करके कहा है” ना तो 100 करोड़ लड़ना चाहते है और ना 15 करोड़ लड़ना चाहते है ये चंद लोग है जिनकी राजनीति डर और साम्प्रदायिकता पर निर्भर है। ये और इनके बयान भाजपा के लिए खाद और पानी है जो भाजपा की नफ़रत की खेती को खड़ा करने में दिन-रात मदद कर रहे है।
वारिस पठान के बयान की जयवर्धन ने की निन्दा
Written by:Gaurav Sharma
Last Updated:
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






