Hindi News
Fri, Jan 9, 2026

MP के नर्सिंग कॉलेजों में भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण मामला, पुरुषों की उम्मीदवारी और पात्रता पर अंतिम निर्णय 07 जनवरी को होगा

Written by:Sushma Bhardwaj
Published:
प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती के माध्यम से 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर की भर्ती की जानी है। इन भर्तियों में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया था।
MP के नर्सिंग कॉलेजों में भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण मामला, पुरुषों की उम्मीदवारी और पात्रता पर अंतिम निर्णय 07 जनवरी को होगा

final decision on the candidature and eligibility of men in nursing college

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर सहित ट्यूटर के कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को दिए जा रहे 100 प्रतिशत आरक्षण को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, हाईकोर्ट की प्रिसिपल बेंच के जस्टिस विशाल धगट की बेंच में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल ना करने और महिला उम्मीदवारों को 100 प्रतिशत आरक्षण देने को चुनौती दी गई है।

7 जनवरी को सूचीबद्ध करने के आदेश

मामले में 29 दिसंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से जबाब तलब करते हुए मामले में जबाब देने हेतु निर्देश दिए थे। इस मामले में आज 6 जनवरी को ही सुनवाई में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ओर से अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने मौखिक रूप से कोर्ट को अवगत कराया है कि भर्ती प्रक्रिया में अब पुरुष उम्मीदवारों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है किंतु लिखित निर्देश की प्रति अभी तक अप्राप्त है। इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 7 जनवरी है इस तिथि के बाद पुरुष उम्मीदवार आवेदन नहीं कर सकेंगे, सुनवाई के बाद कोर्ट ने शासन के निर्णय को लिखित में रिकार्ड में प्रस्तुत करने हेतु एक दिन का समय देते हुए प्रकरण को 7 जनवरी को सूचीबद्ध करने के आदेश दिए हैं।

भर्तियों में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया था

गौरतलब है कि जबलपुर निवासी नौशाद अली एवं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने याचिका दाखिल कर कोर्ट को बताया है कि प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती के माध्यम से 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर की भर्ती की जानी है। इन भर्तियों में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया था, जबकि भर्ती नियम तथा अपैक्स काउंसिल आईएनसी के सभी मापदंड लिंग भेद की अनुमति नहीं देते हैं । उसके बाबजूद लोक स्वास्थ्य कल्याण विभाग के द्वारा की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 तथा भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही थी । याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार की ये भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50% आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया गया है तथा संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत यह प्रत्यक्ष लिंग भेदभाव है। याचिका में माँग की गई है कि 100% महिला आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर याचिकाकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित किया जावे।

पुरुषों की उम्मीदवारी और पात्रता पर होगा अंतिम निर्णय

गौरतलब है कि मामला सामने आने के बाद सरकार ने ट्यूटर के 218 विज्ञापित पदों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया था लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर के कुल 68 पदों पर भर्ती में पुरूषों को अपात्र करार देते हुए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी । लेकिन आज हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मंडल ने याचिकाकर्ताओं की मांगों को मानते हुए पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल करने हेतु मौखिक सहमति व्यक्त की है, अब कल होने वाली सुनवाई में पुरुषों की उम्मीदवारी और पात्रता पर अंतिम निर्णय हो सकेगा।

जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट