प्राकृतिक खेती को लेकर मध्य प्रदेश सरकार लगातार अभियान चला रही है और अब इसका असर कई जिलों में दिखाई देने लगा है। दरअसल झाबुआ जिले के दौरे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन कृषि सखियों और किसानों से सीधे बातचीत की, जिन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और ज्यादा आय हासिल की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह खेती किसानों के साथ-साथ लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है।
दरअसल मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने पर लगातार काम हो रहा है। प्रदेश में कृषि कल्याण वर्ष के तहत ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य किसानों की लागत घटाना, बेहतर उत्पादन दिलाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल झाबुआ जैसे जिलों में प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है।
प्राकृतिक खेती से बढ़ी किसानों की आय
दरअसल मुख्यमंत्री ने मेघनगर विकासखंड के देवीगढ़ गांव की कृषि सखी संगीता डामोर से विस्तार से चर्चा की। संगीता ने बताया कि उन्होंने प्राकृतिक खेती का पांच दिन का प्रशिक्षण लिया और अब करीब 125 किसानों को बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक तरीकों की जानकारी दे रही हैं। उन्होंने बताया कि चार साल से प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनके खेत में गेहूं का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 35 क्विंटल से बढ़कर 45 क्विंटल तक पहुंच गया है। इससे खेती की लागत घटी और मुनाफा बढ़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि सखियां गांव-गांव तक नई तकनीक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। यदि ऐसे मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो छोटे और सीमांत किसानों को भी सीधा फायदा मिल सकता है। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने का बड़ा आधार बताया और उनके प्रयासों की सराहना की।
झाबुआ के किसान बने मिसाल
वहीं मुख्यमंत्री ने झाबुआ विकासखंड के खेड़ी गांव के किसान विमल भाबोर से भी मुलाकात की। विमल ने बताया कि उनके पास 25 बीघा जमीन है और वे खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। उन्होंने पहले जैविक खेती शुरू की और पिछले दो वर्षों से पूरी तरह प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत उन्होंने अपने खेत पर जैव संसाधन केंद्र बनाया है, जहां जीवामृत और अन्य प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनका उपयोग अपने खेत के साथ-साथ आसपास के किसानों को भी उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि पहले खेती से सालाना करीब 50 हजार रुपये की आय होती थी, जबकि अब यह बढ़कर 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा नर्सरी, प्राकृतिक सब्जियों, फलों और वर्मी कम्पोस्ट से भी अतिरिक्त कमाई हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती सिर्फ उत्पादन बढ़ाने का तरीका नहीं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता बचाने, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और किसानों की स्थायी आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने अनुभव दूसरे किसानों के साथ साझा करें ताकि प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा और तेजी से बढ़ सके।






