मंगलवार को रांची में झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का माहौल अचानक गर्म हो गया। सत्र के अंतिम चरण में BJP विधायकों ने सदन के बाहर तख्तियां लेकर नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ खुला विरोध दर्ज कराया।

यह विरोध इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि बजट सत्र के इस दौर में पहली बार विपक्ष इतने तीखे तेवर में दिखा। अब तक छिटपुट विरोध के बाद इस बार रणनीति साफ दिखी, सरकार को सीधे कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज पर घेरने की।

तख्तियों के साथ उतरे विधायक, संदेश साफ था

विधानसभा परिसर के बाहर BJP विधायक संगठित तरीके से खड़े हुए और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन का केंद्र सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि अपराध और सुरक्षा जैसे मुद्दे थे, जिन्हें विपक्ष लगातार जनता के बीच बड़ा मुद्दा बताता रहा है।

नवीन जायसवाल ने कानून-व्यवस्था को बनाया मुख्य मोर्चा

प्रदर्शन का नेतृत्व विपक्ष के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने किया। उनका आरोप रहा कि राज्य में अपराधियों का मनोबल बढ़ा है और हत्या, लूट व रंगदारी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विपक्ष का कहना है कि ऐसी घटनाओं ने आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ाई है और कई इलाकों में लोग रोजमर्रा की आवाजाही तक को लेकर सतर्क रहने लगे हैं।

BJP विधायकों ने महिलाओं की सुरक्षा को भी विरोध का बड़ा बिंदु बनाया। उनका दावा है कि अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और बाजार से जुड़े लोग, खासकर व्यापारी वर्ग, खुद को दबाव में महसूस कर रहा है। रंगदारी की बढ़ती शिकायतों का जिक्र करते हुए विपक्ष ने कहा कि यह सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि रोजी-रोटी और स्थानीय कारोबार के माहौल से जुड़ा संकट है।

सवा साल के कामकाज पर सीधा वार, भ्रष्टाचार और नौकरशाही का आरोप

विपक्ष ने JMM-कांग्रेस-RJD गठबंधन सरकार के सवा वर्ष के कार्यकाल पर भी कड़ा हमला बोला। विपक्षी विधायकों का कहना है कि इस अवधि में प्रशासनिक स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ी है। उनके मुताबिक, भ्रष्टाचार बढ़ा है और नौकरशाही इतनी हावी हो गई है कि जनप्रतिनिधियों की बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

यहीं से विरोध का राजनीतिक अर्थ भी निकलता है। बजट सत्र आमतौर पर आंकड़ों, योजनाओं और खर्च के रोडमैप का मंच होता है, लेकिन विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह खर्च से पहले व्यवस्था की बुनियादी हालत पर बहस चाहता है। कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और व्यापारियों पर दबाव जैसे मुद्दों को आगे रखकर विपक्ष सरकार को रक्षात्मक स्थिति में धकेलना चाहता है।

सत्र के बचे दिनों में यह टकराव और तेज हो सकता है। विपक्ष ने अपना रुख साफ कर दिया है कि वह इन्हीं मुद्दों पर सरकार से सदन के भीतर जवाब चाहता है, और अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन आरोपों का जवाब किस तरह देती है।