सोमवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) कार्यालय के गेट पर माध्यमिक आचार्य परीक्षा के अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन आयोग द्वारा हाल ही में जारी की गई उत्तर कुंजी के वेबसाइट से डाउनलोड न हो पाने के कारण उपजे आक्रोश का परिणाम था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस तकनीकी खराबी के चलते हजारों की संख्या में छात्र इस महत्वपूर्ण उत्तर कुंजी को एक्सेस नहीं कर पाए, जिसके परिणामस्वरूप वे दावा-आपत्ति दर्ज करने की निर्धारित समय सीमा से चूक गए।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों में शामिल राहुल क्रांति ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि माध्यमिक आचार्य परीक्षा की उत्तर कुंजी 23 मार्च 2025 को जारी की गई थी। इसके बाद अभ्यर्थियों को 28 मार्च 2026 तक अपनी दावा-आपत्ति दर्ज करने का समय दिया गया था। हालांकि, उत्तर कुंजी जारी होने के बाद से ही बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इसे जेएसएससी की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड नहीं कर पा रहे थे। राहुल क्रांति ने बताया,
ये भी पढ़ें
“माध्यमिक आचार्य परीक्षा की उत्तर कुंजी 23 मार्च 2025 को जारी की गई थी, लेकिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उसे वेबसाइट से डाउनलोड नहीं कर सके। उनका कहना है कि करीब 5000 अभ्यर्थियों को इस समस्या का सामना करना पड़ा, जिसके कारण वे 28 मार्च 2026 तक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी दावा-आपत्ति दर्ज नहीं कर पाए।”
यह समस्या उन करीब 5000 अभ्यर्थियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है, जो इस परीक्षा में शामिल हुए थे। माध्यमिक आचार्य परीक्षा झारखंड राज्य में शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित की जाती है और यह हजारों युवाओं के लिए सरकारी रोजगार का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। उत्तर कुंजी का डाउनलोड न होना सीधे तौर पर इन अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन है, क्योंकि उन्हें अपने उत्तरों का मिलान करने और यदि कोई त्रुटि हो, तो उस पर आपत्ति दर्ज करने का मौका नहीं मिल पाया। दावा-आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया किसी भी प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का एक अहम हिस्सा होती है। इस प्रक्रिया से वंचित रहने का मतलब है कि अभ्यर्थियों को गलत प्रश्नों या उत्तरों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का अवसर ही नहीं मिला, जिससे उनके परीक्षा परिणाम पर सीधा असर पड़ सकता है।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें: उत्तर कुंजी पुनः अपलोड हो और तिथि बढ़ाई जाए
जेएसएससी कार्यालय के बाहर जुटे अभ्यर्थियों ने आयोग से तत्काल समाधान की मांग की है। उनकी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली मांग यह है कि माध्यमिक आचार्य परीक्षा की उत्तर कुंजी को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर तुरंत पुनः अपलोड किया जाए। अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब तक सभी पात्र उम्मीदवारों को बिना किसी तकनीकी बाधा के उत्तर कुंजी डाउनलोड करने का अवसर नहीं मिलता, तब तक पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं मानी जा सकती। उन्हें आशंका है कि यदि उत्तर कुंजी ठीक से उपलब्ध नहीं कराई गई, तो कुछ अभ्यर्थी महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रह सकते हैं, जो उनकी मेरिट लिस्ट को प्रभावित कर सकता है।
दूसरी मांग यह है कि दावा-आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब उन्हें उत्तर कुंजी ही नहीं मिली, तो वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्ति कैसे दर्ज कर सकते थे? यह एक बुनियादी तर्क है। तिथि बढ़ाना ही एकमात्र तरीका है जिससे सभी 5000 प्रभावित अभ्यर्थियों को अपनी आपत्तियां दर्ज करने का उचित और समान अवसर मिल सके। उनका मानना है कि एक तकनीकी चूक या आयोग की अव्यवस्था के कारण उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए। यह आयोग की जिम्मेदारी है कि वह सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करे।
प्रदर्शनकारियों ने आयोग की उदासीनता पर जताया आक्रोश
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर आयोग के अधिकारियों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आयोग की ओर से मिली उदासीन प्रतिक्रिया ने अभ्यर्थियों में आक्रोश को और बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि जेएसएससी को इतनी बड़ी संख्या में प्रभावित अभ्यर्थियों की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। यह केवल तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि आयोग की कार्यप्रणाली, उसकी संवेदनशीलता और छात्रों के प्रति उसकी जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। इस तरह की अव्यवस्था से आयोग की विश्वसनीयता भी दांव पर लगती है।
अभ्यार्थियों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द से जल्द विचार नहीं किया गया और समस्या का उचित समाधान नहीं निकाला गया, तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे तब तक अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता और उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को इस मामले की गंभीरता को समझना होगा और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे। यह स्थिति हजारों युवाओं के धैर्य की परीक्षा ले रही है और आयोग पर निष्पक्षता बनाए रखने का भारी दबाव है। यदि आयोग तुरंत हस्तक्षेप नहीं करता है, तो यह मामला और भी गहरा सकता है, जिससे न केवल अभ्यर्थियों का भविष्य बल्कि राज्य सरकार की छवि भी प्रभावित होगी।