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असम में चुनाव प्रचार के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर बोला तीखा हमला, आदिवासी अधिकारों और शिक्षा पर दिया जोर

Written by:Shyam Dwivedi
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कोकराझार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता बदलने का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई है। सोरेन ने चाय बागान मजदूरों के हक और झारखंड सरकार के शिक्षा मॉडल को भी प्रमुखता से रखा, जिसे असम में लागू करने की बात कही।
असम में चुनाव प्रचार के दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर बोला तीखा हमला, आदिवासी अधिकारों और शिक्षा पर दिया जोर

असम में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान अपने चरम पर है। इसी कड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोकराझार जिले की गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने फ्रेडरिक्सन हांसदा के समर्थन में जनता से वोट मांगे और अपने संबोधन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला। सोरेन ने इस दौरान झारखंड सरकार की प्रमुख उपलब्धियों को भी विस्तार से बताया, खासकर आदिवासी समाज के उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को उन्होंने प्रमुखता से रखा।

हेमंत सोरेन ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के गौरव और अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने आदिवासी समाज की ऐतिहासिक वीरता और संघर्षों का जिक्र करते हुए लोगों को याद दिलाया कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए हमेशा सजग रहना होगा। सोरेन ने मतदाताओं से चुनावी प्रलोभनों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि अक्सर चुनाव के समय धनबल और अन्य प्रलोभन देकर जनता को लुभाने का प्रयास किया जाता है, लेकिन बाद में इन्हीं प्रलोभनों के पीछे शोषण की गहरी सच्चाई छिपी होती है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा को सबसे बड़ी ताकत बताया और लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि एक शिक्षित समाज ही अपने हक और अधिकारों को पहचान कर उनके लिए लड़ सकता है।

चाय बागान मजदूरों को नहीं मिला उनका हक: सोरेन

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सोरेन ने चाय बागान मजदूरों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में इन मजदूरों का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज तक उन्हें उनका वाजिब हक नहीं मिल पाया है। सोरेन ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय इन मजदूरों को पैसे का लालच दिया जाता है और बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उन्हें भुला दिया जाता है और उनका शोषण जारी रहता है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक असमानता है, जहां देश को आगे बढ़ाने वाले वर्ग को ही मूलभूत सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन से वंचित रखा जाता है। सोरेन ने इस बात पर जोर दिया कि चाय बागान मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

हेमंत सोरेन ने झारखंड मॉडल का किया जिक्र

शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड सरकार द्वारा अपनाए गए मॉडल का जिक्र करते हुए हेमंत सोरेन ने बताया कि उनके राज्य में सरकारी स्कूलों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों के कारण अब बड़ी संख्या में छात्र प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलतापूर्वक हिस्सा ले रहे हैं और उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर हो रहे हैं। सोरेन ने विशेष रूप से आदिवासी छात्रों के लिए किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने दावा किया कि झारखंड सरकार राज्य के आदिवासी छात्रों की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च उठा रही है। यह पहल उन परिवारों के लिए वरदान साबित हुई है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं दिला पाते थे। इस नीति से हजारों आदिवासी छात्र अब इंजीनियरिंग, मेडिकल, कानून और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले पा रहे हैं, जिससे उनके भविष्य के द्वार खुल रहे हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री ने असम की जनता से अपील की कि ऐसी ही व्यवस्था उनके राज्य में भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जिस प्रकार झारखंड सरकार अपने आदिवासी बच्चों को शिक्षित और सशक्त कर रही है, उसी प्रकार असम सरकार को भी अपने आदिवासी और वंचित समाज के बच्चों के लिए ऐसे ही ठोस कदम उठाने चाहिए। सोरेन ने कहा कि शिक्षा में किया गया निवेश ही किसी भी समाज और राज्य की वास्तविक प्रगति की कुंजी है। यदि असम में भी शिक्षा के स्तर में सुधार होता है और सरकार आदिवासी छात्रों की उच्च शिक्षा का खर्च वहन करती है, तो इससे राज्य में एक नई और मजबूत पीढ़ी तैयार होगी जो भविष्य में असम के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहेगी।

हेमंत सोरेन ने कुछ राजनीतिक दलों पर लगाया गंभीर आरोप

अपने संबोधन में हेमंत सोरेन ने कुछ राजनीतिक दलों पर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करने का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये दल जनता को केवल मीठे वादों और झूठे आश्वासनों से भ्रमित करते हैं, जबकि सच्चाई और पारदर्शिता से दूर रहते हैं। सोरेन ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ सच्चाई को जनता के सामने लाना है, ताकि लोग सही और गलत के बीच फर्क कर सकें और किसी भी बहकावे में न आएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी राजनीति का मूलमंत्र आने वाली पीढ़ी को शिक्षित और सशक्त बनाना है। उनका मानना है कि एक शिक्षित और सशक्त पीढ़ी ही अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हो सकती है, किसी भी प्रकार के शोषण या राजनीतिक भ्रमजाल से बच सकती है, और अंततः एक मजबूत व न्यायपूर्ण समाज का निर्माण कर सकती है। यह पहल न केवल व्यक्तिगत उत्थान सुनिश्चित करेगी बल्कि पूरे समुदाय और राज्य के लिए एक स्थायी विकास की नींव भी रखेगी।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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