कर्नाटक MLC चुनाव: क्रॉस वोटिंग से भाजपा में खलबली, नितिन नबीन ने प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेताओं को दिल्ली बुलाया

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में हुई कथित क्रॉस वोटिंग ने भाजपा के भीतर हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने प्रदेश अध्यक्ष सहित कई नेताओं को दिल्ली तलब किया है।
Karnataka MLC Election

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने भाजपा के भीतर एक नई हलचल पैदा कर दी है, जहां क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने पार्टी आलाकमान को भी सकते में डाल दिया है। इन नतीजों के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा सहित कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली तलब किया है। यह तलब संभावित क्रॉस वोटिंग के प्रभाव और उसके पीछे के कारणों की गहन समीक्षा के लिए की गई है, जिससे पार्टी के भीतर एक बड़े मंथन का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम भाजपा के लिए अपने ही गढ़ में ‘अपनों के तीरों से घायल’ होने जैसा है, खासकर तब जब वे बड़े राजनीतिक दल होने का दंभ भरते हैं।

गुरुवार को घोषित हुए परिणाम भाजपा के लिए किसी झटके से कम नहीं रहे। कांग्रेस ने सात में से पांच सीटों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत का परचम लहराया। कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद, पीवी मोहन, शिवन्ना बीएस (मालवल्ली), थिप्पन्नप्पा कामकनूर और विनय कार्तिक जैसे दिग्गजों ने अपनी जीत सुनिश्चित की। वहीं, भाजपा केवल दो सीटें ही हासिल कर पाई, जिसमें लिंगराज पाटिल और रघु आर को जीत मिली। इन नतीजों ने जहां कांग्रेस खेमे में उत्साह भर दिया, वहीं जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार गोविंदराजू को हार का मुंह देखना पड़ा, जिससे उनकी पार्टी की स्थिति और कमजोर होती दिखी। यह साफ देखा जा रहा है कि भाजपा अपनी रणनीति में कहीं न कहीं चूक गई है।

सात सीटों के लिए आठ उम्मीदवारों ने बनाया मुकाबला दिलचस्प

विधान परिषद की सात सीटों के लिए आठ प्रत्याशियों का मैदान में होना ही इस चुनाव को दिलचस्प बना रहा था। शुरुआती आकलन में कांग्रेस के चार और भाजपा के दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। लेकिन असली मुकाबला कांग्रेस के पांचवें प्रत्याशी विनय कार्तिक और जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार गोविंदराजू के बीच आकर अटक गया था। इस कांटे की टक्कर में विनय कार्तिक को दूसरे वरीयता वोटों का महत्वपूर्ण फायदा मिला और वे अंततः विजेता बनकर उभरे। यह स्थिति भाजपा के लिए एक ‘गले की हड्डी’ जैसी बन गई है, क्योंकि उनके विधायकों की ओर से हुई कथित क्रॉस वोटिंग ने पार्टी की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है।

क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस ने बनाई थी विशेष रणनीति

क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को भांपते हुए कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही एक खास रणनीति अपनाई थी। अपने सभी 135 विधायकों को एक रिसॉर्ट में ठहराकर, कांग्रेस ने वोटिंग से ठीक एक दिन पहले उनसे मॉक पोलिंग करवाई। इस मॉक वोटिंग में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी शामिल थे, जिसका मुख्य उद्देश्य पहली बार निर्वाचित हुए लगभग 40 विधायकों को वरीयता आधारित मतदान प्रणाली की बारीकियों को समझाना था। कांग्रेस की यह दूरदर्शिता अब भाजपा के लिए चिंता का सबब बन गई है, क्योंकि उनके अपने ही विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लग रहे हैं। कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखकर एक मजबूत बेरीकेडिंग की थी।

एक प्रत्याशी की जीत के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी। कांग्रेस को पहले से ही यह संदेह था कि जनता दल (सेक्युलर) उसके कुछ विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है, इसीलिए उसने अपने विधायकों को वोटिंग होने तक एकजुट रखा। अब जबकि चुनाव परिणाम आ चुके हैं और भाजपा को उम्मीद से कम सीटें मिली हैं, पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर गहन मंथन का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा नेताओं को तलब करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी इस मामले को हल्के में नहीं ले रही है और दोषियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस आंतरिक ‘घाव’ से कैसे उबरती है और क्या कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलता है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews