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रिटायर्ड चौकीदार से रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया अफसर, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

Written by:Bhawna Choubey
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कटनी में लोकायुक्त की कार्रवाई ने सरकारी दफ्तरों में हलचल मचा दी है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया, जिससे फिर सवाल उठे क्या भ्रष्टाचार पर अब सच में लगाम कसने का वक्त आ गया है?
रिटायर्ड चौकीदार से रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया अफसर, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

कटनी में आज सुबह एक ऐसी कार्रवाई हुई जिसने सरकारी तंत्र में हलचल पैदा कर दी। आम तौर पर लोग सरकारी दफ्तरों में काम के लिए महीनों चक्कर काटते हैं, लेकिन जब रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आई तो लोकायुक्त की टीम ने सीधे कार्रवाई का रास्ता चुना।

एक शिकायत के आधार पर जाल बिछाया गया और जैसे ही अधिकारी ने तय रकम ली, टीम ने मौके पर दबिश देकर उन्हें पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में चर्चा शुरू हो गई है कि अब भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज हो रही है।

लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई से कटनी में हड़कंप

लोकायुक्त पुलिस की जबलपुर टीम ने कटनी में यह ट्रैप कार्रवाई की। टीम को शिकायत मिली थी कि जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री वी. ए. सिद्दीकी एक कार्य की अनुमति देने के बदले रिश्वत मांग रहे हैं।

शिकायत मिलने के बाद पहले इसकी पुष्टि की गई। जब यह साफ हो गया कि रिश्वत मांगी जा रही है, तब लोकायुक्त ने ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। जैसे ही अधिकारी ने 20 हजार रुपये रिश्वत के रूप में स्वीकार किए, टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। इस कार्रवाई के बाद सरकारी कार्यालयों में हलचल मच गई और कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

रिश्वत मांगने की शिकायत कैसे पहुंची लोकायुक्त तक?

सूत्रों के मुताबिक, एक ठेकेदार या संबंधित व्यक्ति का विभागीय कार्य अटका हुआ था। आरोप है कि अधिकारी द्वारा काम आगे बढ़ाने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की गई थी। पीड़ित व्यक्ति ने इसकी शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज कराई। जांच में रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई, जिसके बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की गई। इस पूरी प्रक्रिया में शिकायतकर्ता को भी ट्रैप का हिस्सा बनाया गया, ताकि लेन-देन के समय अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ा जा सके।

जल संसाधन विभाग में क्यों बढ़ती हैं ऐसी शिकायतें?

जल संसाधन विभाग में बांध, नहर, सिंचाई और निर्माण से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट चलते हैं। इन कामों में अक्सर ठेके और अनुमति प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। ऐसे में कुछ मामलों में काम जल्दी करवाने या भुगतान जारी करने के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जहां बड़े प्रोजेक्ट और भुगतान जुड़े होते हैं, वहां भ्रष्टाचार की संभावना भी बढ़ जाती है। इसी कारण ऐसे विभाग लोकायुक्त की निगरानी में रहते हैं।

ट्रैप ऑपरेशन कैसे काम करता है?

बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि लोकायुक्त किसी अधिकारी को रंगे हाथ कैसे पकड़ती है। इसके लिए एक खास प्रक्रिया अपनाई जाती है। सबसे पहले शिकायत की जांच की जाती है। फिर शिकायतकर्ता को विशेष कैमिकल लगे नोट दिए जाते हैं। जब आरोपी अधिकारी उन नोटों को स्वीकार करता है, तो टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है।

बाद में जांच में हाथ या सामान पर केमिकल की पुष्टि भी होती है, जिससे रिश्वत लेने का प्रमाण मिलता है। इस मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई और अधिकारी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार अधिकारी पर अब क्या कार्रवाई होगी?

अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या इससे पहले भी इस तरह की शिकायतें रही हैं या नहीं। यदि अन्य मामले सामने आते हैं तो कार्रवाई और सख्त हो सकती है।

लगातार हो रही लोकायुक्त की कार्रवाई

पिछले कुछ महीनों में लोकायुक्त पुलिस द्वारा कई सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है। इससे आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ रही है कि अगर कोई अधिकारी रिश्वत मांगता है तो उसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है।

 

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