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महिला DSP-SDOP बनीं मजदूर.. ट्रैक्टर पर बैठकर किया ट्रैप ऑपरेशन, मौका मिलते ही आरक्षक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा, TI पर भी हुई कार्रवाई

Written by:Gaurav Sharma
Published:
मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अनूठी कार्रवाई में दो महिला पुलिस अधिकारियों ने मजदूर का वेश धारण कर अवैध वसूली करने वाले आरक्षक को रंगे हाथ पकड़ा। प्रशिक्षु डीएसपी शिवा पाठक और एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी ने ट्रैक्टर पर बैठकर आरक्षक लक्ष्मण पटेल को 500 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इस घटना के बाद आरक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया गया, वहीं थाना प्रभारी अखिलेश दाहिया को भी पद से हटा दिया गया।
महिला DSP-SDOP बनीं मजदूर.. ट्रैक्टर पर बैठकर किया ट्रैप ऑपरेशन, मौका मिलते ही आरक्षक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा, TI पर भी हुई कार्रवाई

मध्य प्रदेश के कटनी जिले के बहोरीबंद थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसा अनोखा ऑपरेशन सामने आया, जिसने सबको चौंका दिया। यहां प्रशिक्षु डीएसपी शिवा पाठक और एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी ने खुद मजदूर का वेश धारण कर ट्रैक्टर पर यात्रा की। उन्होंने अवैध वसूली करने वाले आरक्षक लक्ष्मण पटेल को 500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। यह कार्रवाई उन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई है, जिनमें किसानों और वाहन चालकों से पुलिसकर्मियों द्वारा खुलेआम वसूली की बात कही जा रही थी।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, कटनी पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिनय विश्वकर्मा को पिछले काफी समय से बहोरीबंद थाना क्षेत्र से अवैध वसूली की गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों में विशेष रूप से यह बताया जा रहा था कि सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों, खासकर ट्रैक्टर मालिकों और किसानों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिसकर्मी बेरोकटोक इन वाहनों को रोककर, बेवजह उन्हें परेशान कर, उनसे मनमानी राशि की वसूली करते थे। इन शिकायतों ने पुलिस की छवि को लगातार धूमिल किया था और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा था।

एसपी विश्वकर्मा ने इन शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए एक पुख्ता रणनीति बनाने का फैसला किया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष टीम गठित की, जो सीधे तौर पर इस गोरखधंधे में शामिल लोगों को रंगे हाथ पकड़ सके। इसी के तहत प्रशिक्षु डीएसपी शिवा पाठक और एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी को इस गोपनीय और महत्वपूर्ण ट्रैप ऑपरेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई। इन दोनों महिला अधिकारियों को इस कार्रवाई के लिए चुना गया ताकि वे बिना किसी शक के अपनी पहचान छिपाकर काम कर सकें।

योजना के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 5 बजे, जब आमतौर पर सड़कें शांत रहती हैं, दोनों महिला अफसरों ने अपनी सरकारी वर्दी और पद की पहचान को किनारे रखकर सामान्य मजदूरों का वेश धारण किया। उन्होंने पुराने कपड़े पहने और ऐसा दिखावा किया जैसे वे खेत या किसी निर्माण स्थल पर काम करने जा रही हों। वे किसी भी प्रकार के संदेह से बचने के लिए एक साधारण ट्रैक्टर पर अन्य मजदूरों के साथ बैठ गईं। इस पूरी कवायद का मकसद यह था कि अवैध वसूली करने वाले आरक्षक को उनकी असली पहचान का जरा भी आभास न हो, और वे अपनी हरकतों को जारी रखें।

आरक्षक को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा

बहोरीबंद क्षेत्र में स्लीमनाबाद मोड़ के पास, जहां आमतौर पर वाहनों को रोका जाता था, थाना मोबाइल वाहन पर तैनात आरक्षक लक्ष्मण पटेल ने दोनों महिला अधिकारियों वाले ट्रैक्टर को रोका। बिना किसी हिचकिचाहट के, और अपने रोजमर्रा के अंदाज में, आरक्षक ने ट्रैक्टर चालक से 500 रुपये की मांग की। यह राशि आमतौर पर ‘नंबर’ के नाम पर या किसी अन्य छोटे-मोटे बहाने से वसूली जाती थी। ट्रैक्टर चालक ने आरक्षक को 500 रुपये दिए और आरक्षक ने जैसे ही उन नोटों को अपनी जेब में रखा, ट्रैक्टर पर बैठे दोनों पुलिस अधिकारियों ने तुरंत उसे दबोच लिया। आरक्षक लक्ष्मण पटेल पूरी तरह से स्तब्ध रह गया, जब उसे पता चला कि जिन ‘मजदूरों’ से वह पैसे ऐंठ रहा था, वे असल में पुलिस की वरिष्ठ अधिकारी थीं।

इस सफल और साहसिक कार्रवाई के तुरंत बाद, एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने बिना किसी देरी के सख्त एक्शन लिया। उन्होंने आरक्षक लक्ष्मण पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि पुलिस विभाग में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बहोरीबंद थाना प्रभारी पर भी हुई कार्रवाई, किए गए सस्पेंड

केवल आरक्षक ही नहीं, बहोरीबंद थाना प्रभारी अखिलेश दाहिया पर भी कार्रवाई की गाज गिरी। उन्हें अपने थाना क्षेत्र में लगातार हो रही अवैध वसूली को रोकने में घोर लापरवाही बरतने और अपने मातहतों पर नियंत्रण न रख पाने के आरोप में तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय होगी। फिलहाल, बहोरीबंद थाना की जिम्मेदारी टीआईसी (थाना इंचार्ज) धनंजय पांडेय को अस्थायी रूप से सौंपी गई है।

हटाए गए थाना प्रभारी अखिलेश दाहिया का विवादों से पुराना नाता रहा है। उनके खिलाफ पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, जो उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से जुआ फड़ चलाने वालों को संरक्षण देने, अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने और यहां तक कि वन्यजीवों के मांस से जुड़े कुछ संदिग्ध मामलों में उनकी कथित संलिप्तता की चर्चाएं भी होती रही हैं। इन पुरानी शिकायतों को भी इस ताजा कार्रवाई के बाद फिर से जांच के दायरे में लाया जा सकता है, जिससे उनकी पिछली कार्यप्रणाली की भी गहन समीक्षा हो सके।

कटनी पुलिस द्वारा की गई यह अनोखी और साहसिक कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश है, बल्कि यह आम जनता और विशेषकर किसानों में विश्वास पैदा करने का भी काम करेगी। दो महिला अधिकारियों की यह बहादुरी और सूझबूझ एक मिसाल पेश करती है कि कैसे पुलिस प्रशासन आम आदमी के हित में रचनात्मक और प्रभावी तरीके से कार्य कर सकता है। यह घटना दर्शाती है कि पुलिस विभाग में अभी भी ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं, जो व्यवस्था को स्वच्छ रखने के लिए जोखिम उठाने को तैयार हैं।

Gaurav Sharma
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