अतिक्रमण में भेदभाव की नीति को हम सहन नहीं करेंगे: नंदकुमारसिंह चौहान

अतिक्रमण में भेदभाव की नीति को हम सहन नहीं करेंगे: नंदकुमारसिंह चौहान

खंडवा। सुशील विधानि।

प्रदेश में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। प्रशासन कांग्रेस का एजेंट बनकर कार्य कर रहा है जो लोकतंत्र में ठीक नहीं है। अधिकारी अपने नंबर बढ़ाने के लिए सिविल लॉ का दुरूपयोग कर रहे हैं। राजगढ़ की कलेक्टर ने भारत माता की जय एवं वंदे मातरम कहने पर कार्यकर्ता को थप्पड़ मारे यह उचित नहीं है हम इसकी घोर निंदा करते हैं। प्रशासन और कलेक्टर की भूमिका सत्ता और विपक्ष के बीच रैफरी की होती है न कि स्वयं बल्ला उठाकर चौके लगाने की। प्रदेश में भू माफियों के अतिक्रमण को लेकर भेदभाव किया जा रहा है। भाजपा का तोड़ा, कांग्रेस का छोड़ों यह नीति नहीं होना चाहिए। हम भू माफियाओं के अतिक्रमण को हटाने का स्वागत करते हैं लेकिन किसी भी हालत में भेदभाव हम स्वीकार नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री कहते हैं हम भू माफियाओं को समाप्त कर रहे हैं

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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