मार्च 2026 की दो लगातार शामें आसमान देखने वालों के लिए अहम रहने वाली हैं। 7 और 8 मार्च को सूर्यास्त के बाद पश्चिमी दिशा में शुक्र, शनि और वरुण (नेपच्यून) एक ही क्षेत्र में नजर आएंगे, जहां इनके बीच की कोणीय दूरी काफी कम होगी। यह घटना भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों से देखी जा सकेगी, लेकिन अवलोकन का समय छोटा रहेगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार 7 मार्च की शाम शुक्र और वरुण का बेहद निकट कंजंक्शन बनेगा, जबकि 8 मार्च को शुक्र और शनि पास-पास दिखेंगे। यह युति पश्चिमी क्षितिज के पास होगी, इसलिए देखने वालों को सूर्यास्त के तुरंत बाद तैयारी के साथ आकाश देखना होगा।
“7 मार्च को शुक्र और नेपच्यून बहुत कम दूरी पर होंगे, और 8 मार्च को शुक्र व शनि की निकटता स्पष्ट रहेगी। भारत में यह दृश्य सूर्यास्त के बाद थोड़े समय के लिए ही मिलेगा।” — खगोलविद अमर पाल सिंह
कब और कितनी देर दिखेगा यह खगोलीय संयोग
भारत में इस घटना को देखने की सही खिड़की सूर्यास्त के लगभग 30 से 40 मिनट बाद तक मानी जा रही है। स्रोत के अनुसार सूर्यास्त का संदर्भ समय लगभग शाम 6 बजे के आसपास है, और उसके तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज की तरफ देखना होगा। इसके बाद ये ग्रह तेजी से नीचे जाते हुए क्षितिज के पास छिपने लगेंगे।
अवलोकन की चुनौती यह भी है कि सूर्यास्त के बाद कुछ देर तक आकाश में रोशनी की आभा बनी रहती है। इसी वजह से कई स्थानों पर ग्रहों को पहचानना आसान नहीं होगा, खासकर तब जब स्थानीय क्षितिज धुंधला हो या दृश्यता कम हो।
दो दिनों का क्रम: पहले शुक्र-वरुण, फिर शुक्र-शनि
7 मार्च 2026 को शुक्र और वरुण का मिलन सबसे ज्यादा ध्यान खींचेगा, क्योंकि इनके बीच दूरी मात्र 0°04′ बताई गई है, जो बेहद कम है। अगले दिन 8 मार्च को शुक्र और शनि के बीच दूरी लगभग 1 डिग्री रहेगी, जिसे आकाश में एक उंगली की चौड़ाई के बराबर समझा जा सकता है।
इन दोनों दिनों में शुक्र, शनि और वरुण मीन (Pisces) तारामंडल की दिशा में एक छोटे क्षेत्र में दिखाई देंगे। शुक्र की तेज चमक के कारण उसे पहचानना सबसे आसान होगा, जबकि शनि अपेक्षाकृत धुंधला रहेगा।
कौन-सा ग्रह कैसे दिखेगा, क्या उपकरण चाहिए
शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग -3.8 रहने की जानकारी दी गई है, इसलिए यह सफेद चमकीले तारे जैसा नंगी आंखों से दिख सकता है। शनि का मैग्नीट्यूड लगभग 1.0 होगा; वह शुक्र के पास दिखाई देगा, लेकिन बेहतर दृश्य के लिए बाइनोक्युलर उपयोगी रहेगा।
वरुण (नेपच्यून) नंगी आंखों से नहीं दिखेगा। उसे खोजने के लिए अच्छी टेलिस्कोप की जरूरत पड़ेगी। चूंकि ये ग्रह क्षितिज से लगभग 10°-15° की ऊंचाई पर होंगे, इसलिए वायुमंडलीय हलचल और क्षितिज के पास की विकृति भी अवलोकन को कठिन बना सकती है।
खगोलविदों का कहना है कि शुक्र तेज गति से चलता है और वर्ष के दौरान कई युतियां बनाता है, लेकिन 7-8 मार्च 2026 की यह स्थिति व्यावहारिक तौर पर खास इसलिए है क्योंकि कम समय में लगातार दो शामों पर अलग-अलग ग्रहों के साथ इसकी निकटता दिखेगी। जो लोग यह दृश्य देखना चाहते हैं, उन्हें खुले पश्चिमी क्षितिज वाली जगह, समय की सटीकता और बुनियादी ऑप्टिकल तैयारी के साथ अवलोकन करना चाहिए।






