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जया किशोरी ने क्यों की राधा-कृष्ण के प्रेम की तुलना पर टिप्पणी ? जानिए पूरी बात

Written by:Bhawna Choubey
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जया किशोरी ने हाल ही में दिए एक बयान में कहा कि लोग अपने प्रेम संबंधों की तुलना राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम से न करें। जानिए क्यों उन्होंने ऐसा कहा, और इस बयान पर क्या है धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण।
जया किशोरी ने क्यों की राधा-कृष्ण के प्रेम की तुलना पर टिप्पणी ? जानिए पूरी बात

आज के युवाओं में अक्सर ये सोच पनपती है कि ‘हमारा प्यार भी राधा-कृष्ण जैसा है’ लेकिन इस सोच को हाल ही में जया किशोरी (Jaya Kishori) ने सिरे से खारिज किया है। इंदौर में हुए अपने एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ कहा कि आज के प्रेम को राधा-कृष्ण के प्रेम से जोड़ना सही नहीं है।

जया किशोरी की बात ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। उनके इस बयान ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर ईश्वर के प्रेम और मानव प्रेम में इतना बड़ा फर्क क्या है? चलिए जानते हैं जया किशोरी ने ऐसा क्यों कहा और इसके पीछे का धार्मिक तर्क क्या है।

जया किशोरी ने क्यों की राधा-कृष्ण के प्रेम की तुलना पर टिप्पणी?

जया किशोरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राधा-कृष्ण का प्रेम आध्यात्मिक प्रेम है, जिसमें आत्मा का मिलन होता है, न कि देह का। उनका कहना है कि आजकल की प्रेम कहानियों में आकर्षण और इच्छाएं हावी रहती हैं, जो कि ईश्वरीय प्रेम की भावना से बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राधा-कृष्ण का प्रेम एक निस्वार्थ भक्ति और समर्पण का प्रतीक है, जिसे समझने के लिए आध्यात्मिक दृष्टि की जरूरत होती है।

लोगों ने प्रेम को सिर्फ रोमांस समझ लिया है

जया किशोरी ने युवाओं को समझाते हुए कहा कि आज का प्रेम केवल सोशल मीडिया, चैट्स और आकर्षण तक सीमित रह गया है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि राधा-कृष्ण के पवित्र प्रेम को भी लोग ट्रेंड या इंस्टाग्राम कैप्शन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सही नहीं है।

उनके अनुसार, “राधा और कृष्ण का प्रेम सिर्फ मिलन नहीं था, बल्कि वियोग में भी भक्ति की पराकाष्ठा थी। राधा ने कृष्ण को कभी पाया नहीं, लेकिन फिर भी वह उनका नाम नहीं छोड़ीं।” ऐसा प्रेम आज के युग में दुर्लभ है, इसलिए इसकी तुलना करना केवल ईश्वरीय भावनाओं का अपमान है।

भक्ति और प्रेम के बीच फर्क समझना जरूरी है

जया किशोरी ने अपने भाषण में समझाया कि भक्ति और प्रेम में बहुत बड़ा फर्क होता है। जहां आज का प्रेम जल्दी शुरू होकर जल्दी खत्म हो जाता है, वहीं भक्ति में एक बार जुड़ाव हो जाए तो वह जीवनभर बना रहता है। राधा का प्रेम कृष्ण के लिए मौन साधना जैसा था, जिसमें न कोई अपेक्षा थी, न कोई शर्त। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप वास्तव में अपने प्रेम को पवित्र बनाना चाहते हैं, तो उसमें त्याग, संयम और श्रद्धा जरूरी है। वरना, राधा-कृष्ण का नाम लेकर सिर्फ रोमांटिक भावनाओं को सही ठहराना धार्मिक दृष्टिकोण से अनुचित है।

 

Bhawna Choubey
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मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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