कई बार हम भावनाओं में बहकर अपनी दिल की बातें दूसरों से साझा कर लेते हैं। हमें लगता है कि सामने वाला हमारा अपना है, वह हमारी बात समझेगा और साथ देगा। लेकिन हर व्यक्ति वैसा नहीं होता जैसा हम सोचते हैं। यही बात सदियों पहले आचार्य चाणक्य ने भी कही थी। उन्होंने अपनी चाणक्य नीति में स्पष्ट लिखा कि जीवन में कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें कभी सार्वजनिक नहीं करना चाहिए।
भारतीय इतिहास में आचार्य चाणक्य को महान राजनीतिज्ञ, शिक्षक और अर्थशास्त्री माना जाता है। उनकी चाणक्य नीति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी प्राचीन समय में थी। चाणक्य नीति के अनुसार, आत्म-सम्मान मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि हम अपनी निजी बातें हर किसी के सामने खोल देंगे, तो लोग हमारी कमजोरियों को हथियार बना सकते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि वे कौन से 5 राज हैं जिन्हें भूलकर भी किसी को नहीं बताना चाहिए।
चाणक्य नीति के अनुसार अपनी कमजोरियां और डर कभी न बताएं
चाणक्य नीति में साफ कहा गया है कि अपनी कमजोरी का प्रदर्शन कभी नहीं करना चाहिए। आज जो व्यक्ति आपका मित्र बनकर आपकी परेशानी सुन रहा है, वही कल आपके खिलाफ खड़ा हो सकता है। जब लोग आपके डर और कमियों के बारे में जान जाते हैं, तो वे आपको मानसिक रूप से कमजोर समझने लगते हैं।
मान लीजिए कि आप किसी काम से डरते हैं और यह बात सबको बता देते हैं। भविष्य में कोई व्यक्ति उसी डर का फायदा उठाकर आपको ब्लैकमेल कर सकता है या आपका मजाक उड़ा सकता है। चाणक्य नीति कहती है कि अपनी ताकत दिखाइए, कमजोरी नहीं। जो व्यक्ति अपनी कमजोरियों को छिपाकर उन पर काम करता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है।
धन-संपत्ति और आमदनी का ब्योरा गुप्त रखें
चाणक्य नीति में धन के बारे में भी महत्वपूर्ण बात कही गई है। अपनी आमदनी, बचत और संपत्ति का ब्योरा किसी को भी नहीं बताना चाहिए। जैसे ही लोगों को आपकी आर्थिक स्थिति का पता चलता है, उनके मन में दो तरह की भावनाएं पैदा होती हैं। या तो वे आपसे ईर्ष्या करने लगते हैं, या फिर आपसे मदद की उम्मीद करने लगते हैं।
कई बार रिश्तेदार और जान-पहचान वाले लोग सिर्फ इसलिए पास आते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आप आर्थिक रूप से मजबूत हैं। वहीं अगर आपकी आमदनी कम है, तो कुछ लोग आपको कमतर समझने लगते हैं। चाणक्य नीति कहती है कि धन का दिखावा न करें और न ही उसका हिसाब-किताब हर किसी को बताएं।
भविष्य की योजनाएं समय से पहले न बताएं
चाणक्य का एक प्रसिद्ध विचार है कि किसी भी कार्य को तब तक गुप्त रखें जब तक वह पूरा न हो जाए। अगर आप अपनी योजनाएं पहले ही सबको बता देंगे, तो हो सकता है कोई आपके काम में बाधा डाल दे। चाणक्य नीति के अनुसार, मौन रहकर किया गया काम ही सफल होता है।
मान लीजिए आप कोई नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं या नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं। यदि आप पहले ही सबको बता देंगे, तो कुछ लोग आपको हतोत्साहित कर सकते हैं। कुछ लोग आपकी योजना की नकल भी कर सकते हैं। इसलिए चाणक्य नीति सलाह देती है कि सफलता मिलने के बाद ही उसका उल्लेख करें।
पारिवारिक कलह को घर की चारदीवारी में रखें
हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि घर की बात घर में ही अच्छी लगती है। चाणक्य नीति भी यही सिखाती है। यदि आप अपने पारिवारिक झगड़ों और विवादों को बाहर के लोगों से साझा करते हैं, तो वे सहानुभूति दिखाने के बजाय अक्सर मजाक उड़ाते हैं।
जब आप परिवार की कमजोरियों को सार्वजनिक करते हैं, तो लोग आपके पूरे परिवार के बारे में गलत राय बना लेते हैं। इससे परिवार की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। चाणक्य नीति कहती है कि समझदार व्यक्ति वही है जो घर की समस्याओं का समाधान घर के अंदर ही खोजता है।
दूसरों की गोपनीय बातें उजागर न करें
चाणक्य नीति में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति आप पर भरोसा करके अपनी निजी बात बताता है, तो उसे कभी तीसरे व्यक्ति से साझा नहीं करना चाहिए। दूसरों की गोपनीय बातें फैलाने से आपका चरित्र कमजोर साबित होता है।
समाज में वही व्यक्ति सम्मान पाता है जो भरोसेमंद हो। यदि आप दूसरों की बुराई करते हैं या उनके रहस्य उजागर करते हैं, तो लोग आपसे दूरी बनाने लगते हैं। धीरे-धीरे आपकी विश्वसनीयता खत्म हो जाती है।






