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क्या बिस्तर पर बैठकर जप करना सही है? संत ने दूर की भक्तों की बड़ी उलझन

Written by:Bhawna Choubey
Published:
नाम जप और गुरु मंत्र को लेकर अक्सर लोगों में उलझन रहती है। प्रेमानंद महाराज ने साफ किया कि नाम जप हर स्थिति में संभव है, लेकिन गुरु मंत्र के लिए शुद्धता जरूरी है जानिए इसके पीछे का आध्यात्मिक अर्थ।
क्या बिस्तर पर बैठकर जप करना सही है? संत ने दूर की भक्तों की बड़ी उलझन

कई बार सुबह उठते ही मन भगवान को याद करना चाहता है, लेकिन शरीर बिस्तर छोड़ने को तैयार नहीं होता। ऐसे में मन में सवाल उठता है क्या बिस्तर पर बैठे-बैठे भगवान का नाम जप सकते हैं? क्या यह सही है या इससे भक्ति में कमी आती है? यही सवाल हाल ही में एक भक्त ने दरबार में पूछा।

इसी सवाल का सरल और स्पष्ट जवाब दिया प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने। उनके उत्तर ने लाखों लोगों की उलझन दूर कर दी। उन्होंने बताया कि नाम जप और गुरु मंत्र जप में फर्क समझना बहुत जरूरी है। दोनों का महत्व अलग है और नियम भी अलग हैं।

नाम जप और गुरु मंत्र में क्या अंतर है?

हम सब अक्सर भगवान का नाम लेते हैं राम, कृष्ण, शिव या अपने आराध्य देव का स्मरण करते हैं। इसे ही नाम जप कहा जाता है। यह स्मरण मन को शांति देता है और किसी भी समय किया जा सकता है।

लेकिन गुरु मंत्र अलग होता है। यह मंत्र गुरु द्वारा दीक्षा के समय दिया जाता है। इसे एक खास साधना माना जाता है और इसके लिए शुद्धता और नियमों का पालन जरूरी होता है। प्रेमानंद महाराज समझाते हैं कि नाम जप सामान्य स्मरण है, जो जीवन के हर पल में संभव है। लेकिन गुरु मंत्र एक साधना है, जो अनुशासन और पवित्रता मांगती है।

क्या बिस्तर पर बैठकर नाम जप किया जा सकता है?

दरबार में पूछे गए प्रश्न पर महाराज जी ने स्पष्ट कहा कि बिस्तर पर बैठकर नाम जप करने में कोई समस्या नहीं है। अगर मन में सच्ची भावना है, तो आप कहीं भी भगवान का स्मरण कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि कई बार शरीर थका होता है या स्वास्थ्य ठीक नहीं होता, लेकिन मन भगवान को पुकारना चाहता है। ऐसे समय नाम जप रोकना नहीं चाहिए। बिस्तर पर बैठकर भी नाम जप किया जा सकता है।

गुरु मंत्र जप के लिए क्यों जरूरी है शुद्धता?

महाराज जी ने यह भी समझाया कि गुरु मंत्र का जप कहीं भी नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्थान और स्थिति की पवित्रता जरूरी है। खासकर उस बिस्तर पर गुरु मंत्र का जप नहीं करना चाहिए, जिसका उपयोग गृहस्थ जीवन के लिए होता है। इसका कारण यह है कि उस स्थान की ऊर्जा साधना के अनुकूल नहीं मानी जाती। इसी तरह शौचालय या किसी भी अपवित्र स्थान पर गुरु मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए। गुरु मंत्र को साधना का केंद्र माना जाता है, इसलिए उसका जप स्वच्छ और शांत वातावरण में ही किया जाना चाहिए।

शौचालय में नाम जप क्यों संभव है?

कई लोगों को यह बात अजीब लगती है कि शौचालय में भी भगवान का नाम लिया जा सकता है। लेकिन महाराज जी का कहना है कि नाम जप पर कोई रोक नहीं है। नाम जप मन की प्रक्रिया है। मन को भगवान से जोड़ने के लिए किसी विशेष जगह की जरूरत नहीं होती। जीवन का हर पल ईश्वर का स्मरण बन सकता है। इसलिए, यदि मन में भगवान का नाम आ रहा है, तो उसे रोकना नहीं चाहिए। लेकिन गुरु मंत्र को साधना के नियमों के अनुसार ही जपना चाहिए।

साधना और दैनिक जीवन में संतुलन क्यों जरूरी?

आज के व्यस्त जीवन में हर व्यक्ति के पास लंबा समय नहीं होता कि वह रोज घंटों पूजा कर सके। ऐसे में नाम जप बहुत आसान मार्ग बन जाता है। हम चलते हुए, काम करते हुए, आराम करते हुए भी भगवान का स्मरण कर सकते हैं। इससे मन शांत रहता है और तनाव कम होता है। लेकिन जब बात गुरु मंत्र की आती है, तो हमें थोड़ा समय निकालकर शुद्ध वातावरण में बैठना चाहिए। इससे साधना का प्रभाव बढ़ता है और मन भी स्थिर होता है।

नाम जप कैसे जीवन बदल सकता है?

नाम जप का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह मन को स्थिर करता है। तनाव, चिंता और डर कम होने लगते हैं। जब मन बार-बार भगवान का नाम लेता है, तो नकारात्मक विचार कम होते हैं। परिवार और काम के बीच भी शांति बनी रहती है। इसलिए कई संत नाम जप को सबसे सरल और प्रभावी साधना मानते हैं। इसे किसी विशेष समय या स्थान की जरूरत नहीं होती।

 

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