सर्दियों का मौसम हमें गर्म चाय, धूप और त्योहारों की याद दिलाता है, लेकिन यही मौसम हमारे घर के पौधों के लिए मुश्किल समय लेकर आता है। ठंडी हवा, कोहरा और कम धूप की वजह से कई बार गमलों में लगे पौधे कमजोर पड़ने लगते हैं। पत्तियां पीली हो जाती हैं, नई कलियां आना बंद हो जाती हैं और फूल जल्दी मुरझाने लगते हैं। ऐसे में अक्सर लोग सोचते हैं कि पौधों को बचाने के लिए महंगी खाद खरीदनी पड़ेगी।
लेकिन अगर हम ध्यान से देखें तो हमारे ही किचन में ऐसी कई चीजें मौजूद हैं जो पौधों के लिए किसी महंगे फर्टिलाइजर से कम नहीं। हम अगर सही तरीके से घर पर बना सर्दियों में पौधों के लिए लिक्विड फर्टिलाइजर इस्तेमाल करें, तो पौधे फिर से हरे-भरे और मजबूत हो सकते हैं। आइए समझते हैं कि सर्दियों में पौधों की देखभाल कैसे करें और कौन-कौन से घरेलू उपाय सबसे ज्यादा असरदार हैं।
सर्दियों में पौधों की ग्रोथ क्यों रुक जाती है?
सर्दियों में तापमान कम होने से पौधों की ग्रोथ धीमी पड़ जाती है। पौधों को बढ़ने के लिए धूप, नमी और सही पोषण की जरूरत होती है, लेकिन ठंड के मौसम में ये तीनों चीजें कम मिलती हैं। धूप कम होने से पौधों में खाना बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिसे हम आसान भाषा में पौधों की ऊर्जा बनना कह सकते हैं।
ठंडी हवाओं की वजह से मिट्टी जल्दी ठंडी हो जाती है और जड़ें पोषक तत्वों को सही तरह से नहीं ले पातीं। कई बार हम जरूरत से ज्यादा पानी दे देते हैं, जिससे जड़ें सड़ने लगती हैं। ऐसे में पौधे कमजोर दिखने लगते हैं और फूल भी कम आते हैं।
सरसों की खली से बना लिक्विड फर्टिलाइजर क्यों है खास?
सरसों की खली को लंबे समय से खेती और बागवानी में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं, जो पौधों की जड़ों और पत्तियों को मजबूत बनाते हैं।
हम जब सरसों की खली को पानी में भिगोकर कुछ दिनों के लिए छोड़ देते हैं, तो यह धीरे-धीरे सड़कर पौधों के लिए पोषक तत्व छोड़ती है। इस घोल को पतला करके जब गमलों में डाला जाता है, तो मिट्टी की ताकत बढ़ती है और पौधों में नई जान आ जाती है।
खास बात यह है कि गुलाब, गुड़हल, गेंदे और दूसरे फूलों वाले पौधों में यह खाद बहुत तेजी से असर दिखाती है। कई माली बताते हैं कि महीने में दो बार यह सर्दियों में पौधों के लिए लिक्विड फर्टिलाइजर देने से फूलों का आकार और रंग दोनों बेहतर हो जाते हैं।
किचन वेस्ट से बन सकता है पौधों का सुपर टॉनिक
हम अक्सर सब्जियों और फलों के छिलकों को कूड़े में फेंक देते हैं, लेकिन यही छिलके पौधों के लिए पोषण का खजाना होते हैं। आलू, केले और प्याज के छिलकों में कई तरह के सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं जो मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।
जब इन छिलकों को पानी में कुछ समय के लिए भिगोया जाता है, तो उनमें मौजूद पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं। यह पानी जब पौधों को दिया जाता है, तो मिट्टी का पीएच संतुलित रहता है और जड़ें मजबूत होती हैं।
चाय पत्ती और चावल का पानी
घर में रोज चाय बनती है और चावल भी पकते हैं, लेकिन इनके बाद बची चीजों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि चाय की पत्ती और चावल का पानी पौधों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
चाय की पत्ती मिट्टी को हल्का अम्लीय बनाती है, जो कई पौधों को पसंद होती है। अगर चाय की पत्ती को धोकर सुखा लिया जाए और फिर मिट्टी में मिलाया जाए, तो यह धीरे-धीरे खाद का काम करती है।
इसी तरह चावल धोने के बाद बचा पानी स्टार्च और मिनरल्स से भरा होता है। जब हम इसे गमलों में डालते हैं, तो पौधों को अतिरिक्त पोषण मिलता है और पत्तियों की पीलीपन की समस्या कम होती है।
सर्दियों के समय जब पौधे कमजोर दिखने लगते हैं, तब यह आसान और घरेलू उपाय बहुत काम आता है। हम कह सकते हैं कि यह भी एक सरल लेकिन असरदार सर्दियों में पौधों के लिए लिक्विड फर्टिलाइजर का तरीका है।





