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प्रॉमिस डे पर चांद-तारे तोड़ने की जगह ये वादा क्यों है बेहतर? जानिए रिश्ते में विश्वास के लिए माइक्रो-प्रॉमिसेज कितने जरूरी

Written by:Banshika Sharma
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हर साल 11 फरवरी को प्रॉमिस डे पर कपल्स बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन असल में रिश्ते की नींव रोजमर्रा के छोटे-छोटे वादे यानी 'माइक्रो-प्रॉमिसेज' पर टिकी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, घर के काम में हाथ बंटाने या ध्यान से बात सुनने जैसे वादे पार्टनर में सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करते हैं।
प्रॉमिस डे पर चांद-तारे तोड़ने की जगह ये वादा क्यों है बेहतर? जानिए रिश्ते में विश्वास के लिए माइक्रो-प्रॉमिसेज कितने जरूरी

हर साल 11 फरवरी को आने वाला प्रॉमिस डे कपल्स के लिए एक-दूसरे से प्यार भरी प्रतिबद्धता जताने का खास मौका होता है। अक्सर इस दिन फिल्मी अंदाज में चांद-तारे तोड़ लाने जैसे बड़े और नाटकीय वादे किए जाते हैं। लेकिन क्या असल जिंदगी के रिश्ते इन भारी-भरकम वादों पर टिकते हैं? शायद नहीं।

मनोवैज्ञानिक और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी रिश्ते की मजबूती का राज बड़े वादों में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे कमिटमेंट्स को पूरा करने में छिपा है। कई बार रिश्ते टूटने की वजह कोई बड़ा विश्वासघात नहीं, बल्कि लगातार तोड़े गए छोटे-छोटे वादे होते हैं जो पार्टनर के मन में अविश्वास पैदा कर देते हैं।

क्या होते हैं ‘माइक्रो-प्रॉमिसेज’?

माइक्रो-प्रॉमिसेज यानी वो छोटे-छोटे वादे जो हम अपने पार्टनर से रोज की जिंदगी में करते हैं। यह कुछ भी हो सकता है, जैसे- ‘मैं घर आते समय सब्जी ले आऊंगा’ या ‘आज रात के बर्तन मैं धो दूंगा’। जब आप अपनी थकान के बावजूद इन वादों को पूरा करते हैं, तो आप अनजाने में ही अपने रिश्ते के ‘इमोशनल बैंक अकाउंट’ में विश्वास जमा कर रहे होते हैं।

यह छोटे-छोटे अनुभव आपके पार्टनर को यह अहसास कराते हैं कि आप भरोसेमंद हैं और मुश्किल समय में उन पर निर्भर रहा जा सकता है। यही छोटे वादे आपके साथी को रिश्ते में सुरक्षा और स्थिरता का अनुभव कराते हैं, जो किसी भी बड़े वादे से कहीं ज्यादा कीमती है।

छोटे वादों के पीछे का विज्ञान

इन छोटे वादों का असर काफी गहरा होता है। जब आप अपने कहे हुए छोटे काम पूरे करते हैं, तो यह आपके पार्टनर के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है।

निर्भरता और मानसिक शांति: जब आपका पार्टनर जानता है कि वह छोटी-छोटी चीजों के लिए आप पर निर्भर रह सकता है, तो यह उनके मानसिक तनाव को कम करता है। उन्हें यह यकीन होता है कि आप टीम का हिस्सा हैं।

महत्व का अहसास: ‘मैं शाम को तुम्हें फोन करूंगा’ जैसा छोटा वादा निभाना यह दिखाता है कि आप अपने पार्टनर की भावनाओं और उनके समय की कद्र करते हैं। इससे उन्हें महसूस होता है कि वे आपकी प्राथमिकता हैं।

धोखे की भावना से बचाव: इसके विपरीत, जब आप लगातार छोटे वादे भूल जाते हैं, तो पार्टनर के मन में यह बात घर करने लगती है कि जो इंसान छोटी बात याद नहीं रख सकता, वह किसी बड़ी मुसीबत में क्या साथ देगा?

इस प्रॉमिस डे पर करें ये 3 जरूरी वादे

अगर आप अपने रिश्ते को सच में मजबूत बनाना चाहते हैं, तो इस प्रॉमिस डे पर बड़े वादों की जगह इन माइक्रो-प्रॉमिसेज पर ध्यान दें:

1. वही कहें जो कर सकें: जोश में आकर ऐसे वादे बिल्कुल न करें जिन्हें आप पूरा नहीं कर सकते। अपनी क्षमता के अनुसार ही प्रतिबद्धता जाहिर करें।

2. रोज के कामों में भागीदारी: घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने का वादा करें और उसे निभाएं। यह आपके पार्टनर के मानसिक बोझ को कम करने का सबसे कारगर तरीका है।

3. ध्यान से सुनने का वादा: आज की डिजिटल दुनिया में, ‘मैं तुम्हारी बात बिना फोन देखे ध्यान से सुनूंगा’ जैसा वादा ‘आई लव यू’ कहने से भी ज्यादा मायने रखता है। यह दिखाता है कि आप उन्हें सच में महत्व देते हैं।

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