सुबह जब घर में चावल धोए जाते हैं, तो उसका पानी बिना सोचे-समझे बहा दिया जाता है। हमें लगता है कि इसका कोई काम नहीं। लेकिन सच यह है कि यही साधारण सा चावल का पानी आपके पौधों की किस्मत बदल सकता है। अगर आपके गमले में लगे पौधे कमजोर हो रहे हैं, पत्तियां पीली पड़ रही हैं या फूल नहीं आ रहे, तो इसका आसान उपाय आपके किचन में ही है।
आजकल हर घर में छोटे-बड़े पौधे लगाए जाते हैं। कोई मनी प्लांट लगाता है, कोई तुलसी, तो कोई टमाटर और मिर्च उगाता है। लेकिन कई लोग शिकायत करते हैं कि पौधे ठीक से बढ़ते नहीं। ऐसे में बाजार की महंगी खाद के बजाय अगर आप चावल के पानी से पौधों की ग्रोथ बढ़ाने का तरीका अपनाएं, तो कम खर्च में अच्छा परिणाम मिल सकता है।
चावल का पानी पौधों के लिए क्यों है फायदेमंद
चावल के पानी में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें स्टार्च होता है, जो मिट्टी में अच्छे सूक्ष्म जीवों को बढ़ने में मदद करता है। इसके अलावा थोड़ी मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम भी होते हैं। ये सभी तत्व पौधों की सेहत के लिए जरूरी माने जाते हैं।
नाइट्रोजन पत्तियों को हरा और मजबूत बनाता है। फॉस्फोरस जड़ों को ताकत देता है जिससे पौधा मिट्टी में अच्छी पकड़ बना सके। पोटैशियम फूल और फल आने में मदद करता है। जब ये तत्व मिट्टी में पहुंचते हैं, तो मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और पौधे धीरे-धीरे मजबूत होते जाते हैं। इस तरह चावल के पानी से पौधों की ग्रोथ स्वाभाविक रूप से बढ़ सकती है।
किन पौधों में दिखता है ज्यादा असर
हर पौधे की जरूरत अलग होती है, लेकिन कुछ पौधों में चावल के पानी का असर जल्दी दिखाई देता है। मनी प्लांट में नई पत्तियां तेजी से निकलती हैं। तुलसी की पत्तियां ज्यादा हरी और घनी हो जाती हैं। पुदीना तेजी से फैलता है। टमाटर और मिर्च के पौधों में फूल और फल बेहतर तरीके से आ सकते हैं। गुलाब में कलियां बनना आसान हो सकता है और एलोवेरा की पत्तियां मोटी और स्वस्थ दिख सकती हैं।
अगर हफ्ते या दस दिन में एक बार सही मात्रा में चावल का पानी दिया जाए, तो कुछ ही समय में फर्क नजर आने लगता है। पत्तियां चमकदार दिखती हैं और पौधे ताजगी से भरे नजर आते हैं।
चावल का पानी कैसे करें इस्तेमाल
सही तरीका जानना बहुत जरूरी है। चावल धोने का पहला गंदा पानी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसमें धूल और गंदगी हो सकती है। दूसरा साफ पानी जो चावल धोने के बाद निकलता है, उसे बचाकर रखा जा सकता है। अगर आपने चावल उबाले हैं, तो उसका बचा हुआ मांड भी काम आ सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि उसमें नमक न मिला हो।
पानी को पूरी तरह ठंडा होने दें। गर्म पानी सीधे पौधों में नहीं डालना चाहिए। जब पानी सामान्य तापमान पर आ जाए, तब उसे जड़ों के पास मिट्टी में डालें। छोटे गमले में आधा कप पानी काफी होता है, जबकि बड़े पौधे में एक मग तक दिया जा सकता है। ध्यान रखें कि पानी पत्तियों पर न डालें, क्योंकि इससे दाग या फंगस की समस्या हो सकती है। चावल के पानी से पौधों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए इसे रोजाना न डालें। हफ्ते या दस दिन में एक बार देना ही पर्याप्त है। ज्यादा मात्रा में देने से मिट्टी खराब हो सकती है।
फर्मेंट किया हुआ चावल का पानी
कुछ लोग चावल के पानी को दो या तीन दिन तक ढककर छांव में रख देते हैं। जब उसमें हल्की खमीर जैसी गंध आने लगती है, तो वह फर्मेंट हो जाता है। इस फर्मेंट पानी में सूक्ष्म जीव बढ़ जाते हैं, जो मिट्टी के लिए फायदेमंद होते हैं।
लेकिन फर्मेंट पानी को सीधे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसे बराबर मात्रा में सादे पानी के साथ मिलाना जरूरी है। इसके बाद ही इसे जड़ों के पास डाला जाए। इस तरह इस्तेमाल करने से चावल के पानी से पौधों की ग्रोथ और बेहतर हो सकती है।
किन बातों का रखें ध्यान
अगर चावल पकाते समय उसमें नमक डाला गया है, तो उसका पानी पौधों में नहीं डालना चाहिए। बहुत गाढ़ा मांड सीधे न डालें। अगर मिट्टी पहले से गीली है, तो पानी की मात्रा कम रखें। बीमार या सड़े हुए पौधों में बहुत ज्यादा प्रयोग न करें। संतुलन और सावधानी जरूरी है।
प्राकृतिक गार्डनिंग की ओर एक कदम
आजकल लोग केमिकल खाद का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जो तुरंत असर तो दिखाती है, लेकिन लंबे समय में मिट्टी की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। इसके मुकाबले चावल का पानी एक प्राकृतिक और सस्ता उपाय है। यह मिट्टी की बनावट सुधारने में मदद करता है और पौधों को धीरे-धीरे पोषण देता है।
अगर आप अपनी बगिया को बिना ज्यादा खर्च के हरा-भरा रखना चाहते हैं, तो चावल के पानी का सही इस्तेमाल एक आसान शुरुआत हो सकती है। छोटे-छोटे कदम ही बड़ी हरियाली लाते हैं। अगली बार जब आप चावल धोएं, तो उसका पानी फेंकने से पहले सोचें। यही साधारण पानी आपके पौधों को नई जान दे सकता है और आपकी बगिया को फूलों से भर सकता है।






