इंसान के शरीर में तापमान हमेशा बढ़ता-घटता रहता है। ऐसे में कई बार यह बीमारी का भी कारण बन जाता है। अक्सर सर्दी-जुकाम बहुत ही छोटी बीमारी समझी जाती है, लेकिन इस दौरान बहुत सारे चेंज देखने को मिलते हैं। जब भी जुकाम या सर्दी होती है, तो इंसान बेचैन हो जाता है, उसे किसी भी काम में मन नहीं लगता। कई बार तो इसके कारण बुखार भी आ जाता है, जिससे उसकी बॉडी तपने लगती है। कुछ लोगों को इस दौरान बहुत ज्यादा इरिटेशन भी होता है, जिस कारण वह दूसरों के साथ चिड़चिड़ा पन वाला व्यवहार करते हैं। वहीं कई बार इस दौरान आवाज भारी लगने लगती है। इसे आम भाषा में लोग कहते हैं कि गला बैठ गया है।
हालांकि यह कोई मामूली बात नहीं होती, बल्कि शरीर के अंदर चल रही एक प्रक्रिया का असर होता है, जिस कारण आवाज भारी हो जाता है। कर्कश या बेमेल सी लगने लगती है। आपको खुद की आवाज ऐसी लगती है, मानो कोई और बोल रहा हो।
सर्दी-खांसी से कनेक्शन
इसके पीछे बहुत बड़ा दिलचस्प कारण है। हालांकि लोग इसे बहुत आम समस्या समझते हैं, और सर्दी-खांसी ठीक होते ही यह समस्या चुटकियों में गायब हो जाती है। इसलिए वह इसकी मुख्य वजह को जानना नहीं चाहते या इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाते। लेकिन आज के आर्टिकल में हम आपको गले में खराश और दर्द का सर्दी-खांसी से डायरेक्ट कनेक्शन विस्तारपूर्वक बताएंगे। इससे आप भी जान पाएंगे कि आखिर इस दौरान आवाज फटी हुई या फिर दबी हुई क्यों सुनाई देती है। साथ ही इससे बचने के लिए कुछ जरूरी सेहत टिप्स भी बताएंगे, जिन्हें अपना कर आप अपना खास ख्याल रख सकते हैं।
जानें कारण
जब बात हमारी आवाज की आती है, तो इसके पीछे हमारे गले की बहुत ही नाजुक चीजें काम करती हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में वोकल कॉर्ड्स.. आसान शब्दों में स्वर-तंत्रिकाएं कहते हैं। यह गले में होती हैं और हवा के गुजरने पर कंपन करती हैं, जिससे आवाज निकलती है। लेकिन जब ये स्वर-तंत्रिकाएं किसी कारण से सूज जाती हैं, तो उनका काम बिगड़ जाता है। डॉक्टर इसे लैरिंजाइटिस कहते हैं। सूजन होने पर ये मोटी और भारी हो जाती हैं। ऐसे में ये सही तरह से कंपन नहीं कर पातीं, जिस कारण आवाज गहरी, बैठी या खराब सुनाई देती है।
सर्दियों में खासकर गले की समस्या और बढ़ जाती है। इस मौसम में हमारे गले में बलगम जम जाता है। ये बलगम या म्यूकस वोकल कॉर्ड्स पर चिपक जाता है और उनकी पूरी तरह कंपन करने की क्षमता को रोक देता है। ऐसे में आवाज में खराश, हिचक या असामान्य तरीके से आना आम बात है। कई बार सर्दी ठीक हो जाने के बाद भी अगर बलगम लंबे समय तक बना रहता है, तो आपकी आवाज नॉर्मल होने में समय लेती है।
गले की समस्या में अक्सर लोग बार-बार खांसने या गला साफ करने की आदत डाल लेते हैं। यह आदत उल्टा असर डालती है। बार-बार खांसने से वोकल कॉर्ड्स पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे उनमें खिंचाव आता है। ऐसे में आवाज थकी, फटी या भारी महसूस होने लगती है।
क्यों आवाज होती है भारी?
अब हम आपको बताएंगे कि आवाज भारी क्यों सुनाई देती है। दरअसल, जब वोकल कॉर्ड्स सूज जाती हैं, तो उनका आकार बढ़ जाता है और मोटाई भी ज्यादा हो जाती है। उदाहरण के तौर पर समझिए कि गिटार की मोटी तार से निकलने वाली आवाज भारी होती है, ठीक वैसा ही यहां होता है। स्वर-तंत्रिकाओं के मोटे और सुस्त होने से कंपन की फ्रीक्वेंसी कम हो जाती है।
उपाय
- हालांकि,इससे आपको घबराने की जरूरत नहीं है। बस कुछ आसान तरीके को अपनाकर आप अपनी आवाज को जल्दी ठीक कर सकते हैं। सबसे पहले दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है। पानी गले की सूजन को कम करता है और बलगम को पतला कर देता है। अगर आपके पास ह्यूमिडिफायर है, तो कमरे में उसका इस्तेमाल करें। यह भी गले को मॉइश्चराइज करता है और आराम देता है।
- दूसरी चीज़ अपने गले को पूरा आराम दें। जितना हो सके धीरे बोलें, फुसफुसाएं या कुछ समय के लिए बिल्कुल चुप रहें। आवाज का ज्यादा इस्तेमाल वोकल कॉर्ड्स को थका देता है, जिससे सूजन बढ़ सकता है।
- अगर आपकी आवाज दो-तीन हफ्तों तक भी न सुधरे, तो यह किसी गहरी समस्या का संकेत हो सकता है। जैसे वोकल कॉर्ड्स पर गांठें या एसिड रिफ्लक्स जैसी बीमारियां। ऐसे में तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें।
- इसके अलावा, पानी को गुनगुना करके उससे सेकने से भी गले को राहत पहुंचती है, जो कि एक घरेलू नुस्खा है। वहीं, आप गले में गर्म कपड़ा भी लपेट सकते हैं, जिससे बहुत जल्दी आराम मिलेगा।
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।)






