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छठ पूजा को क्यों कहा जाता है लोकपर्व? जानिए कैसे शुरू हुई व्रत-पारण की यह अनोखी परंपरा

Written by:Bhawna Choubey
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Chhath Puja: छठ पूजा को लोकपर्व के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो भारतीय संस्कृति और आस्था का एक अहम प्रतीक है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है, लेकिन इसकी लोकप्रियता पूरे भारत में फैल चुकी है।
छठ पूजा को क्यों कहा जाता है लोकपर्व? जानिए कैसे शुरू हुई व्रत-पारण की यह अनोखी परंपरा

Chhath Puja: छठ पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने वाला एक महापर्व है। इस अवसर पर जाति धर्म और सामाजिक भेदभाव के सारी दीवारें गिर जाती है। इस पर्व में सभी लोग एक साथ मिलकर भाग लेते हैं चाहे वह सूप दल बनाने वाले हो किसान या सड़क किनारे फल सब्जियां बेचने वाले दुकानदार।

छठ महापर्व का ऐतिहासिक आरंभ बिहार की मुंगेर जिले से हुआ था जिसे धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सीता के नाम से जोड़ा जाता है। कहा जाता है की माता सीता ने सबसे पहले इस पर्व का आयोजन मुंगेर के गंगा तट पर किया था, जब वहां वे रामचंद्र जी के साथ वनवास पर थी। इस घटना ने न केवल छठ पर्व को एक धार्मिक स्वरूप दिया, बल्कि मुंगेर को इस महापर्व का केंद्र बना दिया। आज भी जब छठ का समय आता है, तो मुंगेर के घाटों पर व्रतियों की भीड़ उमड़ पड़ती है, जो इस ऐतिहासिक नगरी के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व एकजुटता और समर्पण का संदेश भी देता है, जो पीढ़ियों से श्रद्धालुओं के दिलों में जीवित है।

छठ पूजा का पवित्र पर्व 5 से 8 नवंबर तक चलेगा

इस वर्ष छठ पूजा का पवित्र पर्व 5 से 8 नवंबर तक चलेगा, जिसमें मुख्य पूजा 7 नवंबर को षष्ठी तिथि के दिन होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस साल सृष्टि तिथि 7 नवंबर को दोपहर 12:41 से शुरू होकर 8 नवंबर की मध्य रात्रि तक रहेगी।

श्रद्धालु 7 नवंबर की शाम को 5:29 बजे सूर्य को पहले अर्घ्य देंगे, और 8 नवंबर की सुबह 6: 37 बजे दूसरा और अर्घ्य अर्पित करेंगे। यह पर्व निष्ठा, समर्पण और प्रकृति के प्रति श्रद्धा को दर्शाता है जिसमें वृद्धि सूरज भगवान की उपासना कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

गंगा स्नान से खरना तक छठ पूजा के खास अनुष्ठान

छठ पूजा को बिहार का महापर्व माना जाता है उसकी लोकप्रियता देश के अन्य राज्यों और विदेशों में भी बढ़ गई है। इस पर्व के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास गहरा है, जो आज से ही मुंगेर के घाटों पर देखने को मिल रहा है। व्रतियों की भारी संख्या गंगा स्नान करने और पवित्र गंगाजल लेने के लिए घाटों पर पहुंच रही है इस बार छठ महापर्व की शुरुआत 5 नवंबर से होगी जब लोग गंगा स्नान के साथ नहाय खाय का आयोजन करेंगे।

इसके अगले दिन खरना का पर्व मनाया जाता है जिसमें खासतौर पर चावल और गुड़ की खीर का प्रसाद तैयार किया जाता है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं केवल एक बार शाम को ही भोजन करते हैं जो इस महापर्व की विशेषता को दर्शाता है। छठ पूजा का यह संपूर्ण कम श्रद्धा समर्पण और पारिवारिक बंदों को मजबूत करने का प्रतीक है।

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Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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