मानसून की ठंडी फुहारें, मिट्टी की खुशबू और गरम चाय की चुस्कियां ये सब सुनकर अधिकतर लोगों को सुकून मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही मौसम कुछ लोगों के लिए एंग्जायटी, लो मूड और मानसिक परेशानी की वजह भी बन सकता है?

जी हां, बारिश का मौसम जहां एक ओर रोमांटिक और ताजगीभरा लगता है, वहीं दूसरी ओर ये हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। कई शोध बताते हैं कि मानसून के दौरान धूप की कमी, उमस, बंद घरों में ज्यादा समय बिताना और सामाजिक गतिविधियों में कमी ये सभी चीज़ें एंग्जायटी ट्रिगर कर सकती हैं।

धूप की कमी से होता है सेरोटोनिन लेवल कम

मानसून के दौरान सूरज कम निकलता है, जिससे बॉडी में ‘हैप्पी हार्मोन’ कहे जाने वाले सेरोटोनिन का लेवल गिर सकता है। इसका सीधा असर हमारे मूड और मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। यही कारण है कि कुछ लोग इस मौसम में ज्यादा थका हुआ, चिड़चिड़ा या डिप्रेस महसूस करते हैं।

अकेलापन और रूटीन का टूटना बढ़ाता है बेचैनी

बारिश के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, लोग अपने काम या सोशल लाइफ से कट जाते हैं। यही चीज़ मानसिक बेचैनी, घबराहट और निगेटिव सोच को जन्म देती है। खासकर उन लोगों में जिनकी पहले से कोई मानसिक स्थिति रही हो।

मानसून एंग्जायटी से कैसे बचें? 

  • रोज़ाना हल्की एक्सरसाइज करें, जैसे योग या वॉकिंग।
  • भरपूर नींद लें और सोने का समय तय रखें।
  • अपने रूटीन को न तोड़ें, घर पर भी एक्टिव रहने की कोशिश करें।
  • दिन में कम से कम 20-30 मिनट बाहर खुली हवा में समय बिताएं।
  • मनपसंद एक्टिविटीज़ करें, जैसे किताब पढ़ना, संगीत सुनना या किसी से बातचीत।