
Madhya Pradesh High Court
जबलपुर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने हजारों शिक्षकों से जुड़ी अवमानना याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुये राज्य सरकार सख्त निर्देश दिये हैं कि 4 सप्ताह में अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों को 6वें वेतनमान का लाभ साल 2006 से देने के आदेश का पालन किया जाये, नहीं तो प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग को अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। बता दें कि मामला प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों से जुड़ा हुआ है। जिन्हें संविलियन के बाद सीनियरिटी, वेतन पढ़ोत्तरी, पेंशन और दूसरे फायदे नहीं मिल रहे थे।
उम्मीद है कि अब शिक्षकों की सैलरी में करीब 15 से 20 हजार रुपए तक का इजाफा और 10 साल का एरियर्स मिलने का रास्ता भी खुल सकता है। हालांकि राज्य सरकार की और से सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की गई थी, जो खारिज की जा चुकी है। इसके बाद दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने समय दिया था।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, इस मामले में हाईकोर्ट में 497 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ वर्ष 2016 से दिया जा रहा है। शिक्षकों का तर्क है कि पहली नियुक्ति से सेवा की गणना किए जाने पर उन्हें वर्ष 2006 से ही वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। ऐसा होने पर 10 साल का बकाया बन सकता है। शिक्षकों के अनुसार, प्रत्येक शिक्षक को करीब 7 से 8 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। साथ ही, इस बकाया राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज दिए जाने की बात भी कही गई है। इससे शिक्षकों के मासिक वेतन में करीब 15 से 20 हजार रुपये तक का अंतर पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने बताया कि राजेश पांडे सहित 497 शिक्षकों ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगाई हुई है । उनका कहना था कि सरकार ने शिक्षा विभाग में संविलियन के लिए 2018 से पहले की उनकी शिक्षकीय सेवा को मान्यता नहीं दी। शिक्षकों ने मांग की कि नौकरी की अवधि पहली नियुक्ति से मानी जाए, ताकि उसी आधार पर उन्हें सीनियरिटी, वेतन बढ़ोतरी, पेंशन और दूसरे लाभ मिल सकें।
हाईकोर्ट के शिक्षकों के पक्ष में फैसले के बाद राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार की ओर से SLP दाखिल की गई, जिसे 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगाकर आदेश का पालन कराने की मांग की।
छठे वेतनमान का लाभ नहीं मिलने पर दायर की अवमानना याचिका
अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने बताया कि शिक्षकों छठा वेतनमान मिलना था, जिसमें कि पंचायत विभाग के अधीन रहने वाले शिक्षकों को 2016 में शिक्षा विभाग नें संवलियन किया गया था। इंदौर हाईकोर्ट ने पहले ही अपने आदेश में लिख चुका था कि 2006 से इन्हें वेतनमान का लाभ दिया जाए, इसके बाद भी जब याचिकाकर्ताओं का लाभ नहीं मिला तो अवमानना याचिका दायर की गई। अधिवक्ता जितेंद्र आर्य के मुताबिक याचिकाकर्ता 497 शिक्षकों के साथ-साथ प्रदेश भर के करीब 70 हजार शिक्षकों को कोर्ट के आदेश के बाद लाभ मिल सकता है।
शिक्षक संगठनों ने 600 से ज्यादा दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने के फैसले पर राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग का आभार जताया। संगठनों का कहना है कि इससे प्रभावित परिवारों को नौकरी के साथ आर्थिक और सामाजिक सहारा मिलेगा।
जबलपुर से वंदना झा की रिपोर्ट
