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सीएम योगी ने लखनऊ को दी विकास कार्यों की सौगात, गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, बोले- जहां लगता था कचरे का अंबार, वहां बना ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’

Written by:Gaurav Sharma
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जहां तीन दशक तक कूड़े के ढेर नजर आते थे, आज वहीं 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' खड़ा है। CM योगी ने 'स्वच्छ लखनऊ' कार्यक्रम में 413 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन कर नई दिशा दी।
सीएम योगी ने लखनऊ को दी विकास कार्यों की सौगात, गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, बोले- जहां लगता था कचरे का अंबार, वहां बना ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’

जहां तीन दशकों से भी अधिक समय तक शहर के कूड़े-कचरे का अंबार लगा रहता था, वह स्थान अब ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ के रूप में एक नई पहचान गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ’ अभियान के तहत मंगलवार को 413 करोड़ रुपये की 342 लोक कल्याणकारी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए इस परिवर्तन को रेखांकित किया। अक्सर देखा जाता है कि शहरी क्षेत्रों में गंदगी और अव्यवस्था का बोलबाला रहता है, लेकिन लखनऊ में यह स्थल इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़े से बड़े दाग को भी मिटाया जा सकता है। जुपिटर हॉल में आयोजित इस समारोह में उन्होंने यह बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि सभी शहरी स्थानीय निकायों का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसमें लखनऊ समेत 17 नगर निगम, लगभग 200 नगर पालिका परिषदें और करीब 500 नगर पंचायतें शामिल हैं, जो कुल मिलाकर 545 शहरी स्थानीय निकायों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस अवसर पर अभियान से संबंधित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

सीएम योगी ने अपने संबोधन में लखनऊ के इस परिवर्तनकारी मॉडल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस जगह को तीन दशकों से अधिक समय तक केवल कूड़ा फेंकने का स्थान माना जाता था, आज वह एक उत्कृष्ट केंद्र बन चुका है। यह स्थल अब विशाल रैलियों, भव्य मंचों और एक संग्रहालय का घर है, जो शहर की पहचान में एक नया आयाम जोड़ रहा है। उन्होंने यहां डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शानदार प्रतिमा की स्थापना का भी जिक्र किया, जिन्होंने ‘एक देश में दो प्रधानमंत्री, दो संविधान और दो झंडे नहीं हो सकते’ का उद्घोष किया था। मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है।

कल्याणकारी योजनाओं को गरीबों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता: सीएम योगी

कल्याणकारी योजनाओं को गरीबों तक पहुंचाना हमेशा से सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है, यह बात सीएम योगी ने स्पष्ट की। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले समाजवादी पार्टी की सरकार में गरीबों के लिए आवास की कल्पना भी मुश्किल थी। हमारी सरकार ने शहरी क्षेत्रों में 17 लाख गरीबों को पक्के मकान दिए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी 65 लाख आवासों का निर्माण कराया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया में न तो किसी का चेहरा देखा गया, न जाति, न क्षेत्र, और न ही मत-मजहब। गरीब, किसान, महिला और युवा को ही केंद्र में रखकर सभी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया है। यह दर्शाता है कि जब नियत साफ होती है तो विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है।

मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 1960 के दशक के उस कथन को भी उद्धृत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश की आर्थिक प्रगति का आकलन शीर्ष पर बैठे लोगों की समृद्धि से नहीं, बल्कि समाज की सबसे निचली सीढ़ी पर बैठे व्यक्ति की प्रगति से किया जाना चाहिए। यह दर्शन ही हमारी सरकार के कार्यों का मूल आधार है, जो एक स्वच्छ, सुंदर और समर्थ समाज के निर्माण की दिशा में अग्रसर है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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