लखनऊ के कसमंडी क्षेत्र में एक बार फिर विवाद गहरा गया है, जहाँ पासी समाज ने बकरीद पर बकरों की कुर्बानी दिए जाने पर विरोध स्वरूप सूअर की बलि देने की चेतावनी दी है। दरअसल यह गंभीर चेतावनी कसमंडी किले को लेकर चल रहे लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बीच सामने आई है। पासी समाज से जुड़े योगेश पासी ने दावा किया है कि कसमंडी की भूमि महाराजा कंस पासी की पुश्तैनी विरासत है और इसी कारण इस इलाके का नाम कसमंडी पड़ा था।
दरअसल योगेश पासी का कहना है कि पिछले चार वर्षों से लगातार इस मुद्दे को उठाया जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया है कि संबंधित स्थान पर अनैतिक तरीके से नमाज अदा की जा रही है। इस संबंध में प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। पासी समाज के नेता ने आगे कहा कि अब युवा समाज जागृत हो चुका है और बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में आगे आ रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि बकरीद के दिन किले में बकरों की कुर्बानी दी गई, तो उसके विरोध में सूअर की बलि देने का काम किया जाएगा।
मामले में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी: योगेश पासी
वहीं इसके साथ ही, योगेश पासी ने यह भी आरोप लगाया कि इस जमीन को हथियाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पासी समाज इस मामले को लेकर अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा और कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। इस चेतावनी और आरोपों के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस बीच, मलिहाबाद के कसमंडी कलां स्थित विवादित स्थल पर हिंदूवादी संगठनों के पहुंचने से भी विवाद में और अधिक तीव्रता आ गई। हिंदू संगठनों ने यहाँ सांकेतिक पूजा-पाठ किया। प्रशासन ने इस स्थल पर बकरीद की नमाज पर रोक लगा दी है, जिसके बाद हिंदू संगठनों का कहना है कि यदि शुक्रवार को नमाज हुई तो वे भी पूजा करेंगे। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले को न्यायालय में ले जाने की बात दोहराई।
हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका
विवादित स्थल पर पहुंचने पर हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया। इसके परिणामस्वरूप, हिंदू महासभा के लोगों ने परिसर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर सांकेतिक पूजा अर्चना की। हिंदू महासभा के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने कानून का पूरी तरह से पालन किया है और 200 मीटर की दूरी से सांकेतिक पूजा की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह लड़ाई कानूनी रूप से लड़ी जाएगी।
मौलाना को गिरफ्तार करने की मांग
शिशिर चतुर्वेदी ने आगे मांग की कि मौलाना को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और यह मंदिर पासी समाज के लोगों को सौंप दिया जाना चाहिए। फिलहाल, मौके पर पूरी तरीके से शांति व्यवस्था बनी हुई है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस और पीएसी जवानों की भारी तैनाती की गई है।
कंसा पासी के कथित किले का विवाद गहराते देख पुलिस ने उस ओर जाने वाले रास्ते पर बैरिकेड लगा दिए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है। एक संगठन के बाद जब दूसरा संगठन वहाँ पहुंचा, तब पुलिस ने उनको समझा बुझाकर शांत कराया और उनके ज्ञापन स्वीकार किए। इन संगठनों की प्रमुख मांग यह थी कि किले के भीतर मजार कैसे बनी और मौलाना को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।






